जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में स्मार्ट पुलिस की जरूरत पर बल दिया है। लेकिन प्रदेश की पुलिस के पास तकनीकी विशेषज्ञ तो दूर कई सालों से नफरी की कमी भी पूरी नहीं हो पाई।
प्रदेश की जनसंख्या लगभग 6.50 करोड़ है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए महज 80 हजार 367 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें आईपीएस से लेकर कांस्टेबल स्तर के पुलिसकर्मी शामिल हैं। यानी औसतन 808 लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रदेश में एक पुलिसकर्मी के हवाले है। नियमानुसार 220 लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी पर होनी चाहिए है।
दरअसल गुवाहटी में आयोजित पुलिस प्रमुखों के सम्मेलन में नरेन्द्र मोदी ने देश को स्मार्ट पुलिस की जरूरत होने की बात कही थी। जो राजस्थान पुलिस के लिए चुनौती है। पुलिस कमिश्नरेट सहित कई जिलों की पुलिस को कारतूसों की कमी के कारण पिछले दो-दो साल से हथियार चलाने की ट्रेनिंग नहीं मिल पा रही है और ना ही प्रदेश की पुलिस के पास दिल्ली और मुंबई पुलिस की तरह टेक्निकल एक्सपर्ट है जो आपराधिक वारदातों का खुलासा करने में सक्षम हों। राजस्थान पुलिस के पास पर्याप्त मात्रा में आधुनिक उपकरण भी नहीं हैं। ऐसे में आपराधिक गतिविधियों पर लगाम नहीं लग पा रही है।