जयपुर। खेती के लिए बिजली कनेक्शन देने के लिए नए सिरे से बनाई जा रही कृषि नीति की लेटलतीफी के कारण 6 हजार से ज्यादा किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं। ट्यूबवेल बनवाने के बावजूद बिजली कंपनी ड्रिप योजना में पिछले छह महीने से कनेक्शन नहीं दे रही है। इससे खेतों में रबी की फसल सूखने के कगार पर है।
ड्रिप (बूंद-बूंद) व फव्वारा योजना में सामान्य श्रेणी से पांच गुणा ज्यादा राशि जमा करवाने के बावजूद किसानों को खेती के लिए बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहे है। योजना में 6 हजार से ज्यादा एग्रीकल्चर कनेक्शन पेंडिंग है। इन्हे डिमांड नोटिस भी नहीं दे रहे है। जबकि कई किसान डिमांड नोटिस की राशि जमा करवाने के साथ ही ट्यूबवेल व सिस्टम पर पांच लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर चुके है।
कनेक्शन नहीं मिलने से किसान कर्जे में डूबने लगे है। किसानों का कहना है कि सामान्य श्रेणी से पांच साल के आवेदकों को भी बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पाया है। जबकि पानी बचाने के लिए शुरु की गई ड्रिप सिस्टम के कनेक्शनों पर भी पाबंदी लगा दी। जबकि ड्रिप सिस्टम के कनेक्शनों में पांच गुणा ज्यादा शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सरकार में किसानों की सुनवाई ही नहीं हो रही है।