जयपुर। सोडाला में पीलिया की मॉनिटरिंग करने में जलदाय व चिकित्सा विभाग के साथ ही जिला प्रशासन भी फेल साबित हुआ है। दूषित पानी सप्लाई होने के बाद फैले पीलिया से पिछले 15 दिन से लोग जूझ रहे हैं, वहीं तीनों ही विभागों के अाला अफसर एक दूसरे पर जिम्मेदारी टालने में लगे हुए हैं। हाल यह है कि तीनों ही विभाग के अफसर अब तक पीलिया फैलने की वजह नहीं तलाश पाए हैं।
दूषित पानी के कारण हुए पीलिया ने क्षेत्र की महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों पर कहर बरपाया है। सुशीलपुरा में पीलिया से पीड़ित एक महिला की मौत भी हो चुकी है, इसके बावजूद अभी तक पीलिया की रोकथाम के लिए कारगर कदम नहीं उठाया गया है।
यह है तीनों जिम्मेदार विभाग:
जलदाय विभाग: स्वच्छ पेयजल सप्लाई करने की जिम्मेदारी है। पेयजल सप्लाई के दौरान सैंपलों की जांच का नियम है, लेकिन सोडाला में सैंपलों की जांच नहीं होने से दूषित पानी का मालूम ही नहीं चला और लोग पीलिया व उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए।
चिकित्सा विभाग: डॉक्टर पीलिया की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में चिकित्सा शिविर लगाते तथा पानी की जांच कर पीलिया के कारणों को स्पष्ट करते। लेकिन विभाग ने इलाज के लिए शिविर लगाने के बजाए केवल सर्वे किया। सरकार के दबाव में पानी को साफ बताते रहे।
जिला प्रशासन: जिले में स्वच्छ पेयजल व चिकित्सा इंतजाम की जिम्मेदारी कलेक्टर की है। कलेक्टर ने पानी के सैंपल के लिए एसडीएम को जिम्मेदारी दी हुई है लेकिन अधिकारियों ने पीलिया बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया।