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6 वर्ष पहले
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जयपुर। जापान के कानाजावा स्थिति इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रो. मनीष बियानी का दावा है कि जापानी कंपनी और इनके इंस्टिट्यूट के सहयोग से बनी फ्लू स्ट्रिप (पेपर क्रोमोटाग्राफी चिप) महज पांच मिनट में एच1एन1 वायरस की मौजूदगी और गैरमौजूदगी को बता सकती है। जयपुर के मनीष बियानी पिछले 16 वर्षों से जापान में हैं और वहां कानाजावा स्थित इंस्टिट्यूट के डिपार्टमेंट ऑफ नैनो बायो इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं। पढ़ें- ऐसे काम करती है पेपर क्रोमोटाग्राफी चिप
इस स्ट्रिप को लेकर मनीष बियानी से दैनिक भास्कर डॉट कॉम ने खास बातचीत की। मनीष ने बताया कि स्वाइन फ्लू की समस्या केवल किसी देश या क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं है। अब यह हर देश में फैल चुका है। जापान में भी यह बीमारी फैल रही है। लेकिन वहां लो कॉस्ट डायग्नोसिस और मिनिमम टाइम को फोकस में रखा जा रहा है।
मौतों की खास वजह डायग्नोसिस में देरी:
मनीष ने बताया कि एच1एन1 बॉडी में बहुत तेजी से फैलता है। ये महज 10 दिन के भीतर मरीज की जान ले लेता है। ऐसे में पहले पांच दिन के भीतर यदि जांच करके इसकी पुष्टि हो जाती है तो प्रभावित को बचाया जा सकता है। वहीं यदि पांच दिन के बाद इसकी जांच होती है तब तक काफी देर हो जाती है। यह वायरस इतना फैल जाता है कि प्रभावित को बचाना मुश्किल हो जाता है। फिलहाल यहां जो जांच हो रही है वो मंहगी है। इसका रिजल्ट भी काफी देरी से मिलता है।
नहीं पता था ऐसा सीन है:
मनीष बियानी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि देश में स्वाइन फ्लू के डायग्नोसिस को लेकर ऐसा सीन है। यहां आने के बाद इन्होंने हालात को देखते हुए जापान से इस स्ट्रिप को मंगाया है। अगले हफ्ते तक इस स्ट्रिप के आने के बाद एसएमएस हॉस्पीटल के डॉक्टर्स के सामने इसका डेमोस्ट्रेशन होगा।
मेक इन इंडिया कंसेप्ट पर काम:
यदि यह डेमोंस्ट्रेशन सफल रहेगा तो मनीष सरकार से इसे भारत में ही बनाने की बात करेंगे। फिलहाल जापान में एक स्ट्रिप बनाने में 450 रुपए का खर्च आता है। यदि भारत में इसे बनाया जाय तो यह कॉस्ट घटकर महज 100 रुपए रह जाएगी। मनीष ने बताया कि मोदी जब जापान गए थे तब उनसे मलाकात हुई थी। उन्होंने मेक इन इंडिया के तहत इंडिया में कुछ करने के लिए मोटिवेट किया था।
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