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6 वर्ष पहले
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जोधपुर। सूर्यनगरी में स्वाइन फ्लू रोगियों का आंकड़ा सौ को पार कर गया है। शहर में शनिवार सुबह तेरह नए रोगी सामने आए। इन्हें मिलाकर अब तक कुल 103 रोगी चिन्हित हो चुके है। वहीं शनिवार सुबह यहां भर्ती बाड़मेर जिला निवासी एक महिला की मौत हो गई। इसे मिलाकर अब तक कुल तेरह जनों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है।
दूसरी तरफ स्वाइन फ्लू से निपटने को चिकित्सा विभाग ने कमर कस ली है। टेमी फ्लू की गोलियों का संकट समाप्त हो चुका है। वहीं स्वाइन फ्लू के संदिग्ध रोगियों की जांच के लिए अब डीएमआरसी में भी सुविधा शुरू कर दी गई है। इस कारण अब जांच कार्य में भी तेजी आ गई है।

जोधपुर में स्वाइन फ्लू का इलाज कराने बाड़मेर से जोधपुर आई पचास वर्षीय इनाई पत्नी कय्याम की आज सुबह मथुरादास माथुर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इनाई का इलाज पहले शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। इसकी तबीयत ज्यादा खराब होने पर दो दिन पूर्व इसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनाई को मिलाकर अब तक शहर में स्वाइन फ्लू से तेरह जनों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में से अधिकांश बाड़मेर व पाली जिले के लोग है।

विभाग ने कसी कमर:
स्वाइन फ्लू से निपटने को अब तक सुस्ती बरत रहे चिकित्सा विभाग ने कमर कस ली है। विभाग ने स्वाइन फ्लू के मरीजों को दी जाने वाली टेमी फ्लू पर्याप्त मात्रा में मंगवा ली है। टेमी फ्लू की पचास हजार गोलियां यहां पहुंच गई है। साथ ही संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए किट की कमी भी दूर हो गई है। इन मरीजों के नमूनों की जांच अब तक सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही हो रही थी। इस कारण जांच रिपोर्ट मिलने में विलम्ब हो रहा था। अब प्रशासन ने डेजर्ट मेडिसन रिसर्च सेन्टर(डीएमआरसी) में भी जांच सुविधा शुरू कर दी है। वर्ष 2008 में जोधपुर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ने के समय सिर्फ डीएमआरसी में ही इसकी जांच की सुविधा थी। बाद में मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा शुरू होने पर डीएमआरसी ने यह कार्य बन्द कर दिया। अब मामले बढ़ने पर इसे फिर से शुरू किया गया है। इसके साथ ही संदिग्ध मरीजों के घरों के आसपास विभाग ने स्क्रिनिंग को जोरदार अभियान चलाया है। ताकि संदिग्ध मरीजों की समय रहते पहचान कर उनका इलाज शुरू किया जा सके। वहीं एक सेमिनार में भाग लेने रांची गए जोधपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमीलाल भाट सेमिनार बीच में ही छोड़ आज सुबह जोधपुर पहुंच गए।