जयपुर। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी लगातार कह रहे हैं कि उनका ध्यान देश के विकास में है। विज्ञान और शिक्षा को बढ़ावा दिए बिना विकास कैसे संभव है। पिछले कई सालों से यह बात हो रही है कि एजुकेशन के लिए जीडीपी कंट्रीब्यूशन महज 2 पर्सेंट ही है। साइंस के लिए ये और भी कम है। ये बढ़ना चाहिए। हालांकि नई गवर्नमेंट से काफी उम्मीदें हैं। देखते हैं आगे क्या होता है। प्रधानमंत्री के साइंस एडवाइजरी काउंसिल के मेंबर रह चुके भारत रत्न वैज्ञानिक प्रो. सीएनआर रॉव ने ये बातें कहीं। सोमवार को प्रो. रॉव राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे।
दैनिक भास्कर डॉट कॉम से हुई बातचीत में प्रो. रॉव ने बताया कि एजुकेशन और साइंस दोनों सेक्टर में सरकार के लेवल पर इकोनॉमिक इनवेस्टमेंट बहुत कम है। यूनिवर्सिटीज और कॉलेज के लिए बजट बहुत कम मिल रहा है। यूनिवर्सिटीज की हालत देखिए, इनका इंफ्रास्ट्रक्चर देखिए। बहुत खस्ताहाल है।
चाइना और साउथ कोरिया आगे
प्रो. रॉव का कहना है कि देश में वैज्ञानिक कड़ी मेहनत कर रहे हैं। साइंस के अनेक क्षेत्रों में हम अच्छा कर रहे हैं। वहीं यदि साइंस को बूस्ट करने के लिए सरकार के स्तर पर इकोनॉमिक इनवेस्टमेंट की बात करें तो ये बहुत कम है। हर ओर ब्यूरोक्रेसी का दबाव है। रिसर्च के क्षेत्र में भी इस दबाव का असर देखने को मिल रहा है। चाइना, साउथ कोरिया जैसे देश साइंस के क्षेत्र में ज्यादा तरक्की रक रहे हैं।
नैनो टेक्नोलॉजी में हम नंबर तीन पर
प्रो. रॉव ने कहा कि मेटेरियल साइंस में भले हम काफी पीछे हैं लेकिन नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम विश्व में तीसरे नंबर पर हैं। इसके लिए बाकायदा टारगेटिंग फंड बनाकर यूनिवर्सिटीज वगैरह में काफी प्रोत्साहित किया गया। इस वजह से हमने इस क्षेत्र में अच्छी तरक्की की।