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19 साल तक की उम्र के बच्चों को डी-वर्मिग खुराक मंगलवार से

6 वर्ष पहले
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जयपुर। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा है कि सबको बेहत्तर स्वास्थ्य मिले की प्राथमिकता को देखते हुए राजस्थान में हैल्थ इंडिकेटर जैसे मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए हाई फोकस जिलों के लिए वित्तीय राशि की कमी नहीं आने दी जाएगी।
हर संस्थान में आने वाले मरीज को गुणवत्ता से युक्त इलाज मिलना चाहिए। नड्डा सोमवार को इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में राष्ट्रीय कृमि उन्मूलन कार्यक्रम की जयपुर से शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने राजस्थान में ओपीडी व इनडोर में आने वाले मरीजों के लिए संचालित निशुल्क दवा व जांच योजना की तारीफ करते हुए कहा कि आमजन के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। नड्डा ने गाइडलाइन का भी विमोचन किया। इस मौके पर भारत सरकार के सचिव बी.पी.शर्मा, अतिरिक्त सचिव सी.के.मिश्रा, संयुक्त सचिव डॉ. राकेश कुमार एवं राजस्थान के प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) मुकेश शर्मा समेत अनेक अधिकारी उपस्थित थे।
दक्षिण राज्यों की तरह बने मेडिकल हब
चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि दक्षिण राज्यों की तरह राजस्थान भी मेडिकल हब बने। यहां पर सात नए खुलने वाले मेडिकल कॉलेज के शुरू होने के बाद राज्य के छात्रों को न तो बाहर जाना पड़़ेगा, न ही आने वाले दिनों में डॉक्टरों की कमी रहेगी। राज्य के दस जिलों में मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम करने के प्रयास किए जा रहे है।

इन राज्यों में निशुल्क दवा
राष्ट्रीय कृमि उम्मूलन नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्रथम चरण में नेशनल डी-वर्मिग डे (दस फरवरी) से राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दादर व नगर हवेली, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु और त्रिपुरा राज्यों के एक से 19 साल तक के बच्चों को मंगलवार से पेट में कीड़े मारने की एल्बेन्डाजोल नामक दवा स्कूलों व आंगनबाड़ी केन्द्रों पर निशुल्क मिलेगी।

कब से मिलेगी:
देश के 11 राज्यों की स्कूलों में दस व 13 फरवरी को तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 10 से 13 फरवरी तक उपलब्ध रहेगी। देश में मिट्टी से फैलने वाले हेल्मिन्थ परजीवी कृमि के संक्रमण से 24 करोड़ बच्चे ग्रसित हैं जिसके कारण बच्चे कुपोषण, खून की कमी, शारीरिक व मानसिक विकास का नहीं होना जैसी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
फोटो राजेश कुमावत।