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6 वर्ष पहले
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" स्वच्छ भारत अभियान" का सपना साकार करेंगी महिलाएं
जोधपुर। सीमावर्ती बाड़मेर जिले के भीमड़ा गांव की महिलाएं अब घर गृहस्थी की ज़िम्मेदारी उठाने के साथ बाकायदा भवन निर्माण कारीगर का प्रशिक्षण ले कर पुरुष कारीगरों के समान ही अपना कौशल दिखाएगी। निर्माण क्षेत्र के कारीगरों में अब तक पुरुषों का ही वर्चस्व रहता आया है। यह पहला अवसर है जब महिलाएं इस क्षेत्र में पुरुषों को चुनौती देने जा रही है। थार के रेगिस्तान में तेल व गैस की खोज करने वाली केयर्न इंडिया ने इसके लिए उन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया है। इस प्रशिक्षण को हासिल करने के बाद ये महिलाएं अब क्षेत्र में कंपनी की ओर से स्वच्छ भारत अभियान के तहत कंपनी की ओर से बनवाए जा रहे शौचालय निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा एक कुशल कारीगर जितनी आमदनी अर्जित कर रही है।
केयर्न इंडिया के सामाजिक दायित्वों में भागीदारी के चलते इस बार अनूठी पहल की गई और इन महिलाओं को कारीगर के रूप में आत्मनिर्भर बनाने के लिए "स्किल ट्रेनिंग " के अंतर्गत इन्हे तीन माह का प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें इन्हे काम की बारीकियां सीखने के लिए मल्टीमीडिया के ज़रिये आधुनिक तकनीकों की भी जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण के दौरान सभी 26 महिलाओं को साक्षर भी किया गया ताकि रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में वो किसी की मोहताज़ न हों तथा कामचलाऊ हिसाब-किताब भी कर सकें।
केयर्न इंडिया की इस पहल के पीछे जो मुख्य उद्देश्य था वो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही उन्हें मुख्य धारा में लाना भी था। बाड़मेर के भीमड़ा गांव की महिलाओं के इस पहले और अनूठे बैच को न सिर्फ प्रशिक्षण ही मिला बल्कि आज वो केयर्न इंडिया के सहयोग से भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे "स्वच्छ भारत अभियान" के अंतर्गत बनाए जा रहे शौचालयों का निर्माण करने में लगी हुई हैं। प्रतिदिन की पांच से छह सौ रुपए की हाजरी उठाने वाली महिलाओं के लिए ये उपलब्धि आज से कुछ माह पूर्व किसी सपने के समान ही थी।
भवन निर्माण के कार्य में अब तक महिलाओं को एक मजदूर के काम तक ही सीमित रखा जाता था, कभी किसी ने महिला कारीगर का नाम तक नहीं सुना था। ठेकेदार से लेकर राजगीर तक सिर्फ पुरुष ही होते थे, महिलाऐं तो मात्र ईंट-गारा ढोने के लिए ही प्रयुक्त होती थीं, लेकिन अब ये वर्जना भी टूट गई है। आज तक पीढ़ी दर पीढ़ी जिस काम को सिर्फ पुरूष करते आए है उसको अब महिलाऐं भी अंजाम देने लगी हैं।
गांव की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करने वाली 44 वर्षीय सुगनी देवी का जीवन अब काफी बदल चुका है। अब उनके घरवाले उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। सुगना का कहना है कि अब मैं एक आम औरत नहीं रही, मुझमे आत्मविश्वास आ चुका है। मुझे लगता है कि ये प्रशिक्षण ढाणी की प्रत्येक महिला के जीवन को बदल देगा।