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6 वर्ष पहले
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नाकाफी साबित हो रही है चिकित्सा विभाग की सक्रियता
जोधपुर। प्रदेश में इन दिनों स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। स्वाइन फ्लू पीड़ितों की संख्या में तेजी से इजाफा होता जा रहा है। लेकिन इसे थामने को सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। प्रदेश के 33 जिलों में से 22 जिलों में स्वाइन फ्लू के रोगी सामने आ चुके है। वहीं दो सबसे बड़े शहरों जयपुर व जोधपुर में इसके सबसे अधिक रोगी सामने आ चुके है। प्रदेश में अब तक सौ से अधिक लोग इससे जान गंवा चुके है। वहीं बारह सौ से अधिक लोग इससे पीड़ित हो चुके है। चिकित्सा विभाग सक्रिय अवश्य हुआ लेकिन इतनी बड़ी आपदा से निपटने को उसकी सक्रियता नाकाफी नजर आ रही है।
अकेले जोधपुर व जयपुर में ही स्वाइन फ्लू पीड़ितों की संख्या छह सौ के पार हो चुकी है। इन दोनों शहरों में पीड़ितों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आसपास के शहरों में यहां पर इलाज कराने आए लोगों के कारण है। इससे साफ जाहिर है कि अन्य जिलों में भी स्वाइन फ्लू तेजी से पांव पसार रहा है। दूसरी तरफ सरकारी स्तर पर पीड़ित लोगों के घरों के आसपास स्क्रिनिंग करने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन अब तक किए प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। मरीजों की संख्या रोजाना बढ़ती जी रही है। जोधपुर में दो दिन पहले पचास व इससे अगले दिन 43 मरीजों के पॉजिटिव होना अपने आप में खतरे की घंटी है। स्वाइन फ्लू से निपटने को जुटे एक सरकारी चिकित्सक का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त कदम उठाए जाने जरूरी है। ताकि हालात पर समय रहते काबू पाया जा सके। उनका कहना है कि वर्ष 2008 में जोधपुर में स्वाइन फ्लू बढ़ने पर सरकार के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से लोगों को जागरूक करने का विशेष अभियान चलाया गया था। ऐसे ही अभियान को अब एक बार फिर चलाया जाना चाहिए। साथ ही राज्य सरकार को स्क्रिनिंग में पूरी ताकत लगा देनी चाहिए ताकि नए मरीजों की पहचान समय रहते हो सके।
बढ़ी जागरूकता
सामान्यतया जुकाम होने पर आमजन चिकित्सकों के पास जाने से कतराते रहे है। वे स्वयं के स्तर पर ही इसका इलाज लेते रहे है। लेकिन शहर में स्वाइन फ्लू बढ़ने के बाद से लोगों में जागरूकता बढ़ी है। साधारण जुकाम होने पर भी लोग इलाज के लिए चिकित्सकों के पास पहुंच रहे है। इनमें से कई लोग चिकित्सकों से स्वाइन फ्लू के इलाज में काम आने वाली टेमीफ्लू टेबलेट लिखने को गुहार लगा रहे है। ताकि इस बीमारी से बचा जा सके। वहीं शहर में इन दिनों मास्क की बिक्री भी बढ़ गई है।
पर्यटन उद्योग होगा प्रभावित
पर्यटन उद्योग बहुत संवेदनशील माना जाता है। किसी स्थान पर छोटी घटना होने का असर इस उद्योग पर सबसे अधिक पड़ता है। ऐसे में स्वाइन फ्लू से इतनी अधिक संख्या में लोगों की मौत होने से इस उद्योग पर सबसे अधिक असर पड़ता नजर आ रहा है। जोधपुर में गुरुवार को स्विटजरलैंड की एक महिला की इससे मौत होने का असर भी पर्यटकों की आवक पर पड़ेगा। इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि खतरे की घंटी बज चुकी है। अब देखने वाली बात यह है कि इससे कितना नुकसान उठाना पड़ेगा। इसका खुलासा तो आने वाले दिनों में ही हो पाएगा।