जयपुर। प्रदेश के करीब 1000 ज्यूडिशियल अधिकारियों को अपने आवास के ड्रॉइंग रूम को सजाने के लिए एक लाख रुपए मिलना शुरू हो जाएंगे। आधे अफसरों को इसी फाइनेंशियल इयर और बाकियों को अगले साल देने का निर्णय किया गया है। हालांकि, इसके लिए ज्यूडिशियल अफसरों को 14 साल तक का बड़ा इंतजार करना पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमल में लाएगी ये सरकार ...
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने 21 अगस्त, 2002 को केबीनेट में इसको मंजूरी दी थी, लेकिन इस पर अमल अब वसुंधरा राजे सरकार में हो रहा है। हालांकि, जजों को एक-एक लाख रुपए दिए जाने से सरकार पर पांच साल में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा भार नहीं पड़ रहा था। देशभर में ज्यूडिशियल अफसरों की सुख-सुविधाओं को लेकर आल इंडिया जज एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इसकी समीक्षा के लिए सेठी आयोग का गठन किया। आयोग की सिफारिश पर कोर्ट ने 21 मई, 2002 में निर्णय दिया, जिसमें कहा गया है कि ज्यूडिशियल अफसर घर पर भी कोर्ट कार्य करते हैं। ऐसे में उनको फर्नीचर एवं लाइब्रेरी डवलप करने के लिए सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। तत्कालीन गहलोत केबीनेट ने 21 अगस्त, 2002 को अफसरों को एक-एक लाख रुपए देने का निर्णय किया।
तीन सरकारें निकल गई, फिर भी अमल नहीं
गहलोत सरकार का कार्यकाल डेढ़ साल रहा, लेकिन केबीनेट के फैसले पर कोई निर्णय नहीं हुआ। इसके बाद पांच साल तक भाजपा सरकार रही। साल 2008 में फिर कांग्रेस की सरकार बनी और सीएम गहलोत बने, लेकिन अपनी ही सरकार के निर्णय पर कोई फैसला नहीं किया जा सका।
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