पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • ये नगर निगम है या आश्रम, कोई साधू बनकर आया तो कोई सफेट पट्टी बांधकर

ये नगर निगम है या आश्रम, कोई साधू बनकर आया तो कोई सफेट पट्टी बांधकर

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जयपुर। स्मार्ट सिटी कॉन्सेप्ट में शामिल किए गए जयपुर और उदयपुर की नगर निगमों की शुक्रवार को बजट बैठकें शुरू हो गई हैं। दोनों ही स्थानों पर बजट पूरी तरह स्मार्ट सिटी को लेकर फोकस किया गया है। हालांकि जयपुर नगर निगम में बजट के दौरान चल रही चर्चा में पार्षद अलग-अलग रूप में अाए हैं। उनके इस रूप से निगम का मीटिंग हॉल अलग ही दिखाई दे रहा है।
चुप रहेंगे कांग्रेसी पार्षद...
असल में एक वार्ड के पार्षद सुशील शर्मा ने विरोध का अनूठा तरीका अपनाया है। वे पूरी तरह साधु के वेश में आए हैं। भगवा कपड़ों में आए सुशील शर्मा का कहना है कि वे तो अब साधु हो गए हैं, क्योंकि उनके हाथ में कुछ काम नहीं रहा। निगम प्रबंधन-मेयर से वे भिक्षा मांगते रहते हैं विकास की, लेकिन साल भर में कुछ हुआ ही नहीं। न तो उन्हें विकास कराने को पैसे मिलते हैं न ही निगम खुद विकास कराता है। सुशील शर्मा निर्दलीय पार्षद हैं।
जैन मुनि बनकर आए हैं कांग्रेसी पार्षद

कांग्रेस के सभी पार्षद तय करके आए हैं कि वे निगम की चर्चा में चुप रहेंगे। विरोध के लिए उन्होंने काली पट्टी नहीं बांधी है, चुप रहने के लिए मुंह पर सफेद पट्टी बांधी है। सभी इसी रूप में यहां आए हैं। कांग्रेस का कहना है कि पिछले साल 1257 करोड़ रुपए का बजट पारित किया गया था। एक साल में केवल 407 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं।
विकास का भाजपा बोर्ड का पैमाना कैसा है, जिसमें 300 करोड़ के करीब तो वेतन और भत्तों में ही खर्च हुए हैं। यानी साल में करीब 100 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं। ऐसे में शुक्रवार को पेश किया गया बजट, पूरी तरह कागजी ही साबित होने वाला है, इसलिए इस पर चर्चा नहीं करेंगे। केवल चुप बैठ रहे हैं पट्टी बांधकर।
अगली स्लाइड में जानिए बजट पेश करने के बाद शुरू हुई चर्चा के बारे में
फोटो भरत सिसोदिया