जयपुर-सीकर। दैनिक भास्कर एग्जाम सीरीज-4 में आरएएस मुख्य परीक्षा-2013 के लिए शनिवार को 72 सजेस्टेड प्रश्न और उनके उत्तर पेश किए जा रहे हैं। सीरीज के तहत अब तक तीन प्रश्नपत्र और उनके उत्तर प्रकाशित किए गए हैं। इसके साथ नई जॉब और एक्सपर्ट्स की राय भी बताई जा रही है।
इस प्रकार हैं प्रश्न और उनके उत्तर...
प्र. 58 : राष्ट्रीय हित गतिशील होते हैं’? उपयुक्त उदाहरण देते हुए समसामयिक विश्व-राजनीति में राष्ट्रहितों की गतिशील प्रकृति का परिचय दीजिए।
उत्तर- राष्ट्रीय हित अंतरराष्ट्रीय राजनीति की एक आधार भूत अवधारणा व विदेश नीति का एक प्रमुख आधार है। किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति की सफलता/असफलता राष्ट्रीय हित की प्राप्ति पर निर्भर करती है।
राष्ट्रीय हित मुख्यतः दो प्रकार के होते है- प्रथम स्थायी व मार्मिक हित, जिनमें राष्ट्र की एकता अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि सम्मिलित है। द्वितीय, अस्थायी हित, जिनमें आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक हित सम्मिलित हैं कोई भी राष्ट्र स्थायी हितों के साथ समझौता करने के लिए तैयार नहीं होता है। चाहे उसे इसके लिए युद्ध आदि का सामना ही क्यों न करना पड़े। राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों की अभिवृद्धि के लिए अनेक कारक या तत्वों का प्रयोग करते है जैसे- 1 कुटनीति 2 प्रचार 3 आर्थिक सहायता 4 गठबंधन एवं संधियां 5 अवपीड़क साधन।
वर्तमान वैश्वीकरण के युग में राष्ट्रीय हित की अवधारणा में परिवर्तन आ रहा है, वर्तमान में राष्ट्र आर्थिक हितों पर बल दे रहे है। आर्थिक हितों की प्राप्ति के लिए राष्ट्र अपने स्थायी हितों विशेषकर अपनी आंशिक सम्प्रभुता का भी त्याग कर रहे है। विभिन्न क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों तथा यूरोपीय आसियान आदि के लक्ष्यों से यह स्पष्ट हो जाता है।
वैश्वीकरण के युग में राष्ट्रीय हितों की प्राप्ति के लिए संघर्ष में वृद्धि हुई। विभिन्न क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों की आपसी प्रतिस्पद्र्धा तथा विकसित एवं विकासशील देशों की विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में आपसी टकराहट इसको स्पष्ट करती है।
वैश्वीकरण के कारण न केवल राष्ट्रीय हितों में टकराहट हुई है। अपितु हितों में एकता भी स्थापित हुई है विभिन्न क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों में एकल व्यापार एवं विदेश नीति इस बात को स्पष्ट करती है।
अंततः राष्ट्रीय हित किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति का आधार तत्व होते है। आज भी स्थायी हित हो या अस्थायी दोनों राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण है, जब तक अंतरराष्ट्रीय राजनीति राष्ट्र-राज्य पर आधारित है, तब तक राष्ट्रीय हित का महत्व भी बना रहेगा।
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