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मजनूं

5 वर्ष पहले
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जयपुर। लैला और मजनू की प्रेम गाथा यूं तो इतिहास में अमर हो गई, लेकिन आज भी इस युगल की मजार पर कपल और प्यार में थके-हारे लोग सजदा करने आते हैं। वैलेंटाइन डे के तहत dainikbhaksar.com आपको राजस्थान से जुड़ी प्रेम कहानियों और रोचक किस्सों से आपको रूबरू करा रहा है। इसी कड़ी में आज पढ़िए लैला और मजनू के बारे में। पाकिस्तान से भी आते हैं लोग...

- लैला-मजनू को एक नहीं हो सके । जुदाई में जान गंवाने वाले लैला-मजनू की मजार राजस्थान के गंगानगर जिले के अनूपगढ़ से करीब 11 किमी दूर है। खास बात यह है कि दोनों की मजार आस-पास ही है। यानी जीते जी नहीं तो मर जाने के बाद दोनों एक दूसरे के करीब हो गए।

- प्यार की इस पावन मजार पर सभी धर्मों के लोग सिर नवाते और सजदा करने आते हैं।

- करगिल वार से पहले पाकिस्तान से लोग भी बेधड़क यहां आते-जाते थे। वार के बाद इस बॉर्डर को सील करके एक आर्मी पोस्ट बना दिया गया। इस पोस्ट का नाम मजनू पोस्ट रखा गया।

पहली नजर में ही लैला का दीवाना हो गया मजनू

दमिश्क के मदरसे में जब (कैस) मजनू ने शाह की बेटी लैला को देखा तो पहली नजर में उससे प्यार हो गया। मौलवी ने उसे समझाया कि वह प्रेम की बातें भूल जाए और पढ़ाई में अपना ध्यान लगाए, लेकिन प्रेम दीवाने ऐसी बातें कहां सुनते हैं। मोहब्बत का असर लैला पर भी हुआ। नतीजा यह हुआ कि लैला को घर में कैद कर दिया गया और लैला की जुदाई में मजनू दीवानों की तरह मारा-मारा फिरने लगा। उसकी दीवानगी देखकर लोगों ने उसे मजनू का नाम दिया।

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