• Hindi News
  • Myth : इस बावड़ी की परंपरा का खुल गया राज तो जान गवां बैठे मीणा

Myth : इस बावड़ी की परंपरा का खुल गया राज तो जान गवां बैठे मीणा

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जयपुर। आमेर महल के पास करीब 200 फीट गहरी और 1800 सीढ़ियों वाली बावड़ी देखकर सैलानी रोमांचित हो जाते हैं। इस पन्ना मीणा की बावड़ी का इतिहास भी मीणाओं के पतन की कहानी कहता है। कहते हैं एक राज के खुल जाने से मीणाओं का यहां कत्ल कर दिया गया था। दीपावली के दिन हुआ था नर संहार…
30 मार्च को राजस्थान अपना स्थापना दिवस मना रहा है। इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा है जयपुर की पन्ना मीणा की बावड़ी के बारे में।

- राजपूत शासन से पहले आमेर में मीणाओं का राज था।
- मीणा शासक हमेशा शस्त्र धारण करके रहते थे। इस वजह से उनको मारना और उनपर विजय प्राप्त करना आसान नहीं था।
- मीणा शासक वर्ष में एक बार दीवाली के दिन इस कुंड में स्नान करके शस्त्र को अपने से दूर रख, अपने पितरों को जल अर्पण करते थे और सामने स्थित शिव मंदिर में पूजा करते थे।
- ये राज मीणाओं के अलावा किसी को पता नहीं था।
- लेकिन इस राज को मीणाओं में एक ढोल बजाने वाले ने राजपूतों को बता दिया।
- राजपूत दिवाली का इंतजार करने लगे। जैसे ही दिवाली के दिन मीणा शस्त्र दूर रखकर कुंड में नहाने उतरे उसी वक्त राजपूतों ने आक्रमण करके मीणा शासक को मौत के घाट उतार दिया।
- इस लड़ाई में मीणा समुदाय के राजा पन्ना मीणा का वध हो गया और आमेर में राजपूतों का शासन हो गया।
- इसके बाद से इस 1300 साल पुरानी बावड़ी का नाम पन्ना मीणा की बावड़ी पड़ गया।
कंटेंट : कन्हैया हरितवाल
फोटो : भगवान चौधरी

अगली स्लाइड में पढ़िए यहां संत रविदास भी रहकर लिख चुके हैं दोहे