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देश के थाने होंगे इंटर-कनेक्टेड, छिप न सकेंगे मुजरिम

8 वर्ष पहले
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लुधियाना । यह खबर अपराधियों के लिए भले ही अच्छी न हो। मगर कानून और व्यवस्था को बने रहते देखने वालों के लिए बहुत ही राहत देने वाली है। क्राइम करके दूसरे राज्यों में जाकर छिप जाने वाले क्रिमिनल्स को ट्रैक करने के लिए देश भर के सभी थानों को इंटर कनेक्ट किया जा रहा है। देश के सभी वांटेड आरोपियों को डाटा बैंक तैयार किया जा रहा है। उनके रिकार्ड को ऑन लाइन चेक किया जा सकेगा। केंद्र सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स की योजना के तहत सभी राज्यों में इसे लागू किया जा रहा है। आगामी दो महीनों के दौरान पुलिस थानों में कागज-पेन की छुट्टी करके सभी काम कंप्यूटर से किए जाएंगे।
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घर बैठे दे सकते हैं शिकायत
इस योजना के शुरू होने के बाद पुलिस की साइट खोल कर किसी भी प्रकार की शिकायत घर बैठे ऑन लाइन दर्ज कराई जा सकती है। कोई भी आदमी कहीं से भी अपनी शिकायत को ई-मेल कर सकता है। अपनी शिकायत की प्रोग्रेस रिपोर्ट को भी ऑन लाइन चेक किया जा सकता है। घर बैठे ही उसकी एफआईआर दर्ज हो जाएगी। यही नहीं, घर बैठे हर रोज एफआईआर के तहत पुलिस की द्वारा की जा रही कार्रवाई का स्टेट्स चेक किया जा सकता है। शिकायतकर्ता घर बैठ कर एफआईआर की कॉपी भी डाउन लोड कर सकता है।

वांटेड मुजरिम दिखेंगे ऑन लाइन

गृह मंत्रालय के अधीन काम कर रही एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो) सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) के नाम से एक प्रोजेक्ट लागू कर रही है। जिसके तहत देश भर में 762 सरवर स्थापित करके थानों को उनके साथ जोड़ा जा रहा है। उनमें हर राज्य के हर थाने में वांटेड अपराधियों का डाटा बैंक बना कर ऑन लाइन किया जाएगा। जिससे क्राइम करके दूसरे राज्यों में जाकर छिपने वाले अपराधियों को पहचान और पकड़ पाना आसान हो सकेगा।
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चोरी की गाड़ी ट्रेस करना होगा आसान
पहले जहां चोरी हुई गाडिय़ों को ट्रेस करना बेहद जटिल काम था। वहीं, अब इस योजना के लागू होने पर चोरी की गाड़ी को तलाश करना आसान हो सकेगा। पुलिस चोरी हुई गाड़ी का पूरा विवरण इस साइट पर डाल देगी। चोरी हुई गाड़ी किसी भी स्टेट में नजर आने पर पुलिस कब्जे में लेकर संबंधित पुलिस को सौंप देगी। इससे चोरी की गाडिय़ों को बरामद करने में मदद मिल सकेगी।

हर थाने में होंगे 4 कंप्यूटर्स
जून 2009 में तैयार की गई इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने 2 हजार करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी थी। जिसके तहत हर जिले के हेड क्वाटर्स को 25 कंप्यूटर्स और हर थाने को 4 कंप्यूटर्स लगाए जाएंगे। इन्हें ऑपरेट करने के लिए थानों में तैनात पुलिस मुलाजिमों को पुलिस लाइन में ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी गई है। हर थाने से 4-4 मुलाजिमों को भेज कर ट्रेनिंग दी जा रही है।
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टाटा कंपनी को दिया गया कांट्रेक्ट

पंजाब में इस प्रोजेक्ट का कांट्रेक्ट टाटा कंपनी की टीसीएस ब्रांच को दिया गया है। यह कंपनी हर थाने में फिटिंग के साथ-साथ कंप्यूटर, फर्नीचर, एसी तो देगी ही। साथ में ट्रेनिंग के लिए इंजीनियर भी मुहैया करवाएगी। इसके लिए सभी थानों में बीएसएनल के कनेक्शन लेने के बाद फिटिंग का काम पूरा हो चुका है। इस योजना के तहत आफिस बनाने के लिए कंपनी ने 10><10 साइज के कमरे की मांग की है। जिन थानों में इस साइज के कमरे नहीं है, वहां उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कोट्स

अब तक हर सरकारी डिपार्टमेंट को कंप्यूटराइज्ड किया जा चुका है। अब हमारे डिपार्टमेंट को भी किया जा रहा है। इससे न केवल पुलिस का मैनुअल काम खत्म हो जाएगा। बल्कि पुलिस के काम में पारदर्शिता आएगी।
ईश्वर सिंह, कमिश्नर पुलिस लुधियाना