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डाउनलोड करेंलुधियाना । बेटे के कातिलों को पकड़वाने के लिए मैं अपने आखिरी सांस तक लड़ता रहूंगा। जब तक उनको सलाखों के पीछे नहीं भिजवा देता, तक चैन से नहीं बैठूंगा। हत्यारों ने बड़े बेरहमी से मेरे विशाल को मारा था। होली के दिनों में पिचकारी लेकर खेलने गया , विशाल वापस नहीं आया। इतना कहते ही मिश्रा चौक के रहने वाले भूपिंदर कुमार का गला भर आया।
भूपिंदर ने बताया कि उसके बेटे विशाल उर्फ कालू का शव 29 मार्च 1997 को इलायची गिरी मंदिर के स्टोर से विक्षिप्त हालत में मिला था। जिसका चेहरा बुरी तरह से खराब था और उसके कपड़ों व सामान से ही उसकी पहचान हुई थी। हत्या के आरोप में मामला दर्ज करने के बाद पिछले 16 वर्षों में भी आज तक पुलिस बेटे के कातिलों को गिरफ्तार नहीं कर सकी। जब कि वह अधिकारियों के दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काट चुका है। हर अधिकारी उसे आश्वासन देकर वापस भेज देता है।
बिगड़ गया स्वास्थ्य
भूपिंदर ने बताया कि बेटे के कातिलों को पकड़वाने की कोशिश उन्हें कई तरह की धमकियां मिली और उनकी सेहत भी खराब हो गई। रोजी रोटी कमाने के लिए वह चाय की रेहड़ी लगा कर गुजारा कर रहा है। भूपिंदर की पत्नी अरुणा ने बताया कि बेटे ही हत्या के बाद ही उसके गम में वह बीमार हो गई। बीमारी के कारण उसकी दाई टांग व बाजू ने काम करना बंद कर दिया था। उनकी बेटी ही निजी कंपनी में काम करती है।
नहीं भूल पाते वह आखिरी क्षण
भूपिंदर ने बताया कि वह बेटे के साथ बिताए आखिरी क्षण आज भी नहीं भूल सकता। 22 मार्च 1997 को होली से कुछ दिन पहले विशाल अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। वह करीब 5 बजे खेलते हुए घर वापस आया और दोबारा 7 बजे वापस चला गया। जाते हुए वह दोस्तों को अपनी नई पिचकारी व रंग भी दिखाने के लिए ले गया। लेकिन देर रात तक जब वापस न आया तो उसे ढूंढना शुरू किया गया। दरेसी के निकट के सभी मंदिरों व अन्य स्थानों पर उसे ढूंढा। जहां तक कि रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर भी अपने बेटे की तलाश की । लेकिन जब कुछ भी पता न चला तो तब थाना डिवीजन नं. 4 में शिकायत दी। पुलिस ने डीडीआर उसकी तलाश शुरू कर दी।
मुसीबतों को टूट पड़ा पहाड़
आसूं पोछते हुए भूपिंदर ने बताया कि 7 दिन के बाद लालू मल गली का एक दुकानदार ने बताया कि मंदिर के स्टोर में एक बच्चे का शव पड़ा। पता चलते ही वह अपने रिश्तेदारों को साथ लेकर मौके पर गया तो देखते ही उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। शव बदबू मार रहा था और चेहरा भी खराब हो चुका था। उसके कपड़ों से उसकी पहचान की गई।
किसी तांत्रिक पर था शक
भूपिंदर ने आरोप लगाया कि हत्या में किसी तांत्रिक ने की थी क्योंकि उसके माथे पर नाखूनों के निशान थे। उसके शरीर से मांस का टुकड़ा भी गायब था। गंभीरता से जांच करने की बजाए तत्कालीन अधिकारी ने हत्या का मामला दर्ज कर दिया। उसका आरोप है कि मौके से कई सबूत भी नहीं लिए गए और कुछ कोई इधर उधर कर दिया। पुलिस को शक था कि किसी जानकार ने ही इस वारदात को अंजाम दिया है, जिसे स्टोर के बारे में जानकारी थी।
दोबारा शुरू हुई जांच
भूपिंदर ने बताया कि उसने एक बार फिर पुलिस कमिश्नर ईश्वर सिंह को इस संबंध में शिकायत दी है। जिन्होंने मामले की जांच एसीपी नार्थ को सौंप दी। उसने आशा है कि इस बार जांच में पुलिस हत्यारों तक पहुंच जाएगी।
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