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सात साल की उम्र में हुआ था राजतिलक, सरकार के खिलाफ छेड़ दी थी जंग

5 वर्ष पहले
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रायपुर। नक्सलियों का गढ़ कहलाने वाले बस्तर क्षेत्र के कभी राजा हुआ करते थे प्रवीरचंद्र भंजदेव। प्रवीर का महज 7 साल की उम्र में राजतिलक हो गया था। महज 35 साल की उम्र में पुलिस फायरिंग में उनकी मौत हो गई थी। इसलिए मारा था अंग्रेज अफसर को तमाचा...
- महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी और प्रफुल्ल चन्द्र भंजदेव के दूसरे बेटे के रूप में प्रवीरचंद्र भंजदेव का जन्म शिलांग में 12 दिसंबर 1929 को हुआ था। अंग्रेजों ने कर्नल जे सी ग्रिबसन को इनका संरक्षक नियुक्त किया था।
dainikbhaskar.com सिरीज ‘छत्तीसगढ़ के राजघराने’ के तहत अपने रीडर्स को बता रहा है प्रदेश के राजपरिवारों के बारे में। आज पढ़िए बस्तर स्टेट के आखिरी राजा स्व. प्रवीरचंद्र भंजदेव के बारे में...
- ग्रिबसन कुछ दिनों की छुट्टी पर गया हुआ था और उसकी अनुपस्थिति में गौरीदत्त जोशी ने प्रवीर और उनके भाई-बहनों की देखभाल की थी। तब पहली बार बच्चों ने भारतीय भोजन जैसे दाल, मठा, कढ़ी, पूड़ी जैसे व्यंजनों को चखा।

- ग्रिबसन के लौटने पर बच्चों ने इसी तरह के भोजन की मांग रखी तो उसने इनकार कर दिया और उलटे राजकुमार को डांटते हुए गालियां दी। इस पर गुस्सा होकर प्रवीर ने ग्रिबसन के गाल पर तमाचा जड़ दिया।

- ग्रिबसन की शिकायत पर पॉलिटिकल एजेंट ने मामला मेडिकल काउंसिल को भेजा जिसने प्रवीर को पागल घोषित कर दिया था।

बचपन में ही शुरू की राजनीति
प्रवीर का राजनीतिक जीवन तो उनके बचपन में ही शुरू हो गया था। उनकी माता और बस्तर की महिला शासिका महारानी प्रफुल्ल कुमारी की रहस्यमय मौत के बाद लंदन में ही ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधियों ने अंत्येष्टि से पहले 7 साल के प्रवीरचंद्र भंजदेव का राजतिलक कर दिया।

प्रवीर के शासनकाल में ब्रिटिश शासन के खिलाफ तेज आंदोलन चल रहा था। 1942 में मुंबई में हुई कांग्रेस की मीटिंग में यह फैसला लिया गया था कि अंग्रेजों को भारत छोड़ना ही होगा।
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