रायपुर। डेंटल कॉलेज के संविदा डॉक्टरों को रायपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से ज्यादा वेतन मिल रहा है। सामान्यत: मेडिकल से कम माने जाने वाले डेंटल के डॉक्टरों को ज्यादा वेतन दिया जाना आश्चर्यजनक है। बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग को पर्याप्त संख्या में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर खोजे नहीं मिल नहीं रहे हैं। अब जल्द ही डेंटल कॉलेज के खाली पदों को भरने के लिए वॉक इन इंटरव्यू किया जाएगा। सोमवार को तारीख तय होने की संभावना है।
डेंटल कॉलेज में संविदा में आठ एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर) व तीन प्रोफेसरों की भर्ती के लिए वॉक इन इंटरव्यू आयोजित किया गया। इसमें गिने-चुने डॉक्टर ही शामिल हुए। जबकि रीडर को ९५ हजार रुपए व प्रोफेसर को एक लाख 20 हजार रुपए एकमुश्त मासिक वेतन दिया जाना है। गौर करने वाली बात यह है कि मेडिकल कॉलेज के रीडर व प्रोफेसर को इतना वेतन नहीं दिया जा रहा है। रायपुर मेडिकल कॉलेज में रीडर को 80 हजार व प्रोफेसर को 90 हजार रुपए एकमुश्त वेतन दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज जगदलपुर व रायगढ़ के डॉक्टरों को जरूर विशेष भत्ता के नाम पर रायपुर मेडिकल कॉलेज से ज्यादा वेतन दिया जा रहा है। इसके बावजूद दोनों ही कॉलेज में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। जानकार डेंटल के डॉक्टरों को ज्यादा वेतन देने पर सवाल भी उठा रहे हैं, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी इसे समय की मांग बता रहे हैं।
ज्यादा वेतन के बाद भी डॉक्टरों के लाले
ज्यादा वेतन के बावजूद डेंटल के डॉक्टरों को लाले पड़े हुए हैं। प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज में 20 से ज्यादा कंसल्टेंट डॉक्टरों के पद खाली है। इसी कमी की वजह से डेंटल काउंसिल आफ इंडिया यानी डीसीआई 13 साल बाद भी पीजी की एक भी सीटों को मंजूरी नहीं दी है। जबकि प्रदेश के चार निजी डेंटल कॉलेजों में पीजी की 82 सीटें हैं। मोटी फीस की वजह से मध्यम वर्गीय परिवार के छात्र एमडीएस नहीं कर पाते। निजी कॉलेज से निकलने वाले टीचिंग के बजाय प्रैक्टिस को महत्व देते हैं। यही कारण है कि डेंटल कॉलेज में टीचिंग फैकल्टी की कमी पहले से चली आ रही है। दूसरी ओर स्टूडेंट्स भी बीडीएस करने के बजाय एमबीबीएस में एडमिशन को प्राथमिकता देता है।