उम्र १०४ साल की, बकरियां बेचकर गांव में बनवा दिए टॉयलेट / उम्र १०४ साल की, बकरियां बेचकर गांव में बनवा दिए टॉयलेट

उम्र १०४ साल की, बकरियां बेचकर गांव में बनवा दिए टॉयलेट

Feb 21, 2016, 06:35 PM IST
रायपुर. राजनांदगांव के कुर्रूभाट गांव में रविवार को हुई पीएम मोदी की सभा में बड़ी बात तो रूर्बन मिशन की देशव्यापी शुरुआत थी, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पीएम द्वारा कुंवर बाई के पैर छूने की हो रही है। 104 साल की कुंवर ने बकरियां बेचकर न सिर्फ अपने घर में शौचालय बनवाया बल्कि पूरे गांव को इसमें मदद भी की।
'हर महिला का मान रहना चाहिए'
राजधानी रायपुर से करीब 90 किमी दूर धमतरी की कुंवर बाई 104 साल की उम्र में भी इस कोशिश में जुटी हैं कि गांव की हर महिला का मान रहे, हर घर में टॉयलेट हो। अपनी बकरियां बेचकर टॉयलेट बनवाने के बाद उन्होंने इसमें उनकी भी मदद की जिनके पास पैसे नहीं थे। आज गांव के हर घर में टॉयलेट है।
'सबसे बड़ी तकलीफ खुले में जाना'
कुंवर बाई के दो बेटे थे। उनमें से एक की मौत बचपन में हो गई और दूसरा 30 साल पहले चल बसा। घर की महिलाओं को ही घर की गाड़ी खींचनी पड़ी। कुंवर के मुताबिक इतने संघर्ष के दौर में सबसे बड़ी तकलीफ खुले में टॉयलेट के लिए जाना होता था। जब तक मजबूरी थी, तब तक चला। लेकिन उनकी बहू और उसके बाद नातिन के सामने यही मजबूरी आई तो वह देख नहीं पाईं।
शुरुआत घर से
कुंवर ने कहा, "मैंने तय कर लिया कि टॉयलेट बनवाएंगी। कड़ा फैसला लेकर अपनी आधा दर्जन बकरियां बेच दीं। इससे मिले 22 हजार रुपए से गांव का पहला शौचालय अपने घर में बनवाया। फिर हर परिवार के पास पहुंची कि महिलाओं का मान बचाने के लिए टॉयलेट बनवाना चाहिए।"

मुसीबतों के बीच जीवन
कोटभर्री गांव में 18 घर हैं और रहने वाले परिवाराें में ज्यादातर मजदूर हैं। पिछले 50 साल से यहां रह रही कुंवर बाई ने तकरीबन 30 साल गरीबी में काटे। कुंवर की आखिरी कमाई ही अब उसका हौसला है।

कदम उठे तो बढ़ी सरकार
कुंवर बाई का टॉयलेट बनाने का फैसला जल्दी ही गांव की सरहद पार कर गया। खबर फैली तो सरकारी एजेंसियां सामने आईं और कुंवर बाई का काम आसान हो गया। कुंवर के गांव के सभी 18 घरों में शौचालय है।
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(फोटो- भूपेश केशरवानी)
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