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पानी में छुपकर भी नहीं बचेगा दुश्मन

9 वर्ष पहले
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रायपुर। तलवार त्रिशूल और तवर 124 मीटर लंबी वो शिप है, जिसे इंडियन नेवी पानी में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए इस्तेमाल करती है। इसमें मौजूद आर बी 6000 रॉकेट लांचर से 6 ब्रह्मोस्त्र मिसाइल छोड़कर समुद्र मार्ग से आने वाले दुश्मन का सफाया किया जा सकता है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से आयोजित दूसरे राज्य स्तरीय खेल उत्सव में खिलाडिय़ों को नौसेना की ताकत से परिचित कराया जा रहा है।


पानी के अंदर भी होती है सर्चिंग


रविवि परिसर में बने एनसीसी डोम में एनसीसी की नेवी विंग के अफसर बता रहे हैं कि किस तरह शिप में लगे सोनार सिस्टम से दुश्मन की अंडर वॉटर पनडुब्बियां भी सर्च की जा सकती है। इसमें लगी टारपीडो ट्यूब से सतह और पानी के अंदर छिपी पनडुब्बियों को ध्वस्त किया जा सकता है। 35 नॉटिकल माइल की गति से चलने वाले इस फ्रीगेट में मैन पावर और जरूरत की सामग्री सप्लाई करने के लिए ध्रुव हेलिकॉप्टर लैंड हो जाता है।


के क्लास शिप


नौ सेना की के क्लास शिप के बारे में जानकारी देते हुए खिलाडिय़ों को बताया जा रहा है किस तरह इस शिप से भारतीय समुद्र क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रही नौका को चेतावनी दी जाती है। के क्लास शिप में कृपन, कुठार, किर्च. खुखरी और कोरा जैसी सात शिप शामिल हैं। पूर्वी नौसेना कमांड इनका इस्तेमाल विशाखापट्टनम में करता है। समुद्र की सतह पर 15 किलोमीटर तक की रेंज में मौजूद दुश्मन की नौका और पनडुब्बी को इसमें मौजूद तोप से मिसाइल छोड़कर ध्वस्त किया जा सकता है। 30 नॉटिकल माइल की गति से चलने वाली इस शिप पर हेलिकॉप्टर चेतक लैंड किया जा सकता है।

तैयार हो रही हैं परमाणु पनडुब्बी


नौसेना की बढ़ती ताकत के बारे में जानकारी देने के लिए ब्रॉशर और मॉडल के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। यू बोट पनडुब्बी का मॉडल भी यहां रखा गया है। फिलहाल भारत के पास बैटरी ऑपरेटेड पनडुब्बियां ही है जिन्हें चार्ज करने के लिए 24 घंटे के अंतराल से सतह पर लाना होता है। अमेरिका, ब्रिटेन और रशिया जैसे देशों के पास परमाणु पनडुब्बियां है। भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए हमारे यहां भी परमाणु पनडुब्बियां बनाई जा रही हैं। भारत में तैयार परमाणु पनडुब्बी का इन दिनों परीक्षण किया जा रहा है।

लाइफ जैकेट


खिलाडिय़ों को लाइफ जैकेट और ट्यूब दिखाकर, आपात काल की स्थिति में इनका इस्तेमाल करके समुद्र में अपनी जान बचाने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।