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मेडिटेशन से मिलती है मन को शांति

9 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर. रायपुर
खमतराई स्थित ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में चल रहे अलविदा तनाव शिविर में मंगलवार को मेडिटेशन का महत्व समझाया गया। जिसमें मेडिटेशन करने से सकारात्मक विचार मन में आते हैं और इससे तनाव दूर होकर खुशी मिलती है। तनाव प्रबंधन विशेषज्ञ प्रियंका बहन प्रशिक्षण दे रही है। मेडिटेशन करने पर हमारे शरीर में एंडार्फिन नामक द्रव्य बनता है, जो कि स्वाभाविक रूप से दर्द निवारक का काम करता है। मनुष्य वस्तुओं और सुविधाओं के संग्रह में दिन-रात जुटा हुआ है। जिसकी न कोई सीमा है और न ही अन्त। उसके जीवन में विश्राम नहीं है। मजे की बात यह है कि जिन वस्तुओं को जुटाने में वह दिन-रात एक करता है। उन्हीं का सुख लेने के लिए उसके पास समय नहीं रहता है।

निकाले खुद के लिए समय: अपने लिए थोड़ा समय निकालने और अपने आपसे बातें करे। एकांत में स्वयं से पूछें कि मैं कौन हूँ? मैं इस संसार में क्यों आया हूं ? आखिर मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है ? कहीं ऐसा न हो कि जीवन अपने अंतिम चरण पर पहुंच जाए और खुद को खाली महसूस करें। इसलिए रोज कुछ समय स्वयं के लिए निकालकर अपने से बातें करें। राजयोग मेडिटेशन की प्रारंभिक अवस्था ही स्वयं से बातें करना है। जब भी मेडिटेशन करने बैठें तो मन को पहले से ही एक लक्ष्य दें कि मुझे आज इस विचार का अनुभव करना है।

मानसिक शांति का अनुभव: राजयोग मेडिटेशन का बहुत ही सुंदर तरीके से अनुभव कराया। शिविरार्थियों ने मानसिक शां‍ति का अनुभव किया। उनके मन के व्यर्थ संकल्प शांत होते चले गए। गुस्सा काफूर हो गया। धड़कनें सामान्य होने लगी। पूरे शिविर में सन्नाटा पसरा था और सभी जगह शांति का अनुभव हो रहा है। शिविर में ये भी बताया गया कि इस मेडिटेशन को राजयोग इसलिए कहते हैं क्योंकि इसके द्वारा हम अपनी कर्मेन्द्रियों के राजा बन जाते हैं। इसे खुली आंखों से किया जाता है। अन्य योगों में और राजयोग में फर्क सिर्फ यह है कि इसमें किसी गुरु आदि का ध्यान नहीं करते हैं।