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नकली व एक्सपायरी दवाओं को लेकर घिरे स्वास्थ्य मंत्री

9 वर्ष पहले
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रायपुर। विधानसभा में बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल को विपक्ष ने नकली व एक्सपायरी दवाओं के मामले में घेरा। उनका आरोप था कि प्रदेश नकली दवाएं खपाने का बाजार बन गया है। इन दवाओं से लोग मर रहे, मरीजों की आंखों की रोशनी जा रही है और सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है। मंत्री से संतोषजनक उत्तर न मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉक आउट किया।


प्रश्नकाल के दौरान विधायक कुलदीप जुनेजा ने यह मामला उठाया। सरकारी अस्पतालों नकली व एक्सपायरी दवाएं खपाई जा रही हैं। बालोद, कवर्धा और बागबहरा में मरीजों आंखों की रोशनी चली गई है। लोगों के स्वास्थ्य के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है। इस पर विपक्षी विधायकों ने शेम-शेम के नारे लगाए। मंत्री ने कहा कि उन्होंने जो मूल प्रश्न किया है उससे यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता। इतना सुनते ही पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा कि तो क्या लोगों की आंखें फोडऩा जारी रहे?


धरमजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश नकली दवाएं खपाने दवा माफियाओं का अड्डा बन गया है। उन्होंने मंत्री से कहा कि प्रदेश की जनता को दवा माफियाओं के भरोसे न छोड़े। ड्रग इंस्पेक्टरों के रिक्त पद भरे और मेडिकल स्टोर्स की जांच करवाए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मंत्री जी बताएं कि ड्रग इंस्पेक्टर हर महीने कितनी दवा दुकानों की जांच करते हैं। चौबे ने कहा कि मंत्री केवल नकली दवाओं के 5 और एक्सपायरी दवा का एक मामला होने की जानकार दे रहे हैं जबकि प्रदेश नकली दवाओं का बाजार बन गया है। बागबहरा, बालोद व अन्य जगहों पर लोगों की आंखें चली गई है। महिलाओं के यूटरस निकाले जा रहे हैं। सरकार जवाबदेही से उत्तर नहीं दे रही है। उसे आसंदी का संरक्षण है। इसके खिलाफ सदन से बहिर्गमन किया जाता है। सरकार होश में आओ-नकली दवा बेचना बंद करो के नारे लगाते हुए विपक्ष के सदस्य सदन से चले गए।


....तो डॉक्टर अंधे नजर आते -


विधायक भजन सिंह निरंकारी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री जी, भला हो कि यहां लोकतंत्र है। अगर राजाओं का राज होता तो आंख के बदले आंख का कानून लागू रहता। और जो डाक्टर मरीजों की आंखों से खिलवाड़ करते वे भी अंधे नजर आते। निरंकारी ने मांग की कि स्वास्थ्य के नाम पर खिलवाड़ बंद किया जाए।


मंत्री का वक्तव्य -


2008 से 25 जनवरी 13 तक नकली दवा के 5 और एक्सपायरी दवा का एक मामला दर्ज किया गया है। पांचों प्रकरण कोर्ट में लंबित है जबकि एक्सपायरी दवा के केस में मेडिकल स्टोर्स का लाइसेंस 5 दिन के लिए निलंबित किया गया था। मानक, अमानक और एक्सपायरी दवाओं के अलग-अलग मानक हैं। नकली दवा के मामले में कॉम्प्रोमाइज नहीं किया जाएगा. किसी के भी खिलाफ शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।