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हर चीज में इंट्रेस्ट लीजिए तभी बढ़ेगा ब्रेन पॉवर

9 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर. रायपुर
99 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पानी पानी ही रहता है, लेकिन एक ाध डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ते ही पानी भी रूप बदल लेता है। एग्जाम सिंसेयरिटी भी उतनी ही अच्छी जितना आप एग्जाम को लेकर परेशान न हो। अंकों के जादूगर बी एन राव बता रहे हैं आपको तनाव दूर करने के टिप्स।
याद की हुई चीजें लेफ्ट ब्रेन से केवल 10 प्रतिशत ही रिकॉल होती है, जबकि राइट ब्रेन से 90 प्रतिशत बातें रिकॉल की जा सकती है। पिक्चर देखिए, खेलिए हर चीज में इंटरेस्ट लीजिए इसी से आपका राइट ब्रेन एक्टिवेट होगा। कोई भी व्यक्ति कितना ही बड़ा विद्वान क्यों न हो, एक बार पढऩे के बाद वह 100 प्रतिशत याद नहीं रख पाता।
बच्चे समझते हैं एक बार पढ़ लिया और हो गया, जबकि एक बार ध्यान से पढऩे के बाद दूसरी बार उस टॉपिक को सरसरी निगाह से देख लिजिए। ऐसे में उम्र भर चीजें याद रख सकते हैं। बच्चे तब ज्यादा परेशान हो जाते हैं, जब पैरेंट्स बच्चों पर विश्वास नहीं करते। पैरेंट्स और बच्चों को एक दूसरे पर विश्वास रखना चाहिए। पैरेंट्स को बच्चों को अपने आप पढऩे देना चाहिए, न की प्रेशर डालना चाहिए।
सैयद फाजिल, स्टे्रस स्पेशलिस्ट
माय नेम इज एग्जाम और आई एम नॉट ने टेरेरिस्ट। एग्जाम कहता है कि डरो मत सामना करो मेरा। मॉम बच्चे से कहती है मैं किचन में हूं, तुम जोर जोर से पढ़ो, मुझे सुनाई देना चाहिए। बच्चा जोर जोर से पढ़ेगा तो थक जाएगा, उसका ध्यान पढ़ाई में कम चिल्लाने में ज्यादा होता है। एग्जाम फोबिया भी यहीं से आता है। बच्चों को चाहिए कि वह हाई पिच पर न पढ़ें, न ही हमिंग साउंड यानी भुनभुन करते हुए पढ़ें दरअसल। एक ही पिच में भी न पढ़ें। इससे पढ़ाई से बहुत जल्दी मन ऊबने लगता है। एक ही जगह बैठकर न पढ़ें, हर 22 मिनट में ब्रेक लें। टहलकर पढि़ए। कक्षा 6 में यदि बच्चे के 50 प्रतिशत हैं तो 12 वीं तक पहुंचते हुए यदि हर क्लास में वह ६ प्रतिशत बढ़ा ले तो इस टेंशन से निजात ही मिल जाएगी। हमेशा नहाकर पढ़ें, थोड़े थोड़े समय में खाते रहिए। यह टिप्स अपनाइए आप एग्जाम टेंशन आपको छू भी नहीं पाएगी।
मुकेश शाह स्टे्रस स्पेशलिस्ट
हम कहते हैं हमें कुछ याद नहीं होता, यानी आपने माइंड का ऑर्डर दे दिया ऐसे में माइंड को जैसे ऑर्डर मिलता है वह वैसा काम भी करता है। आप भूल जाइए कि आपको याद नहीं रहता। अपने आपको ऑर्डर दीजिए। पूर्व और उत्तर ज्ञान का केन्द्र होते हैं, इसलिए स्टडी टेबल पूर्व और उत्तर मे ही होना चाहिए। स्टडी टेबल पर लाइट या सफेद कलर का ही कपड़ा बिछाना चाहिए। जिस दीवार पर ट्यूबलाइट लगी हो उस दीवार के नीचे न पढ़ें। बीम कॉलम के नीचे भी पढऩे से बचना चाहिए। पढ़ते पढ़ते थक जाएं तो पूर्व या उत्तर दिशा में खड़े हो जाएं, इससे आपको 3 मिनट में ही एनर्जी मिल जाएगी। स्टडी टेबल के ठीक सामने अपनी लाइफ की बेस्ट ड्राइंग, टीचर्स रिमार्क और किसी कंपटीशन में मिला हुआ सर्टिफिकेट जरुर रखें। यह चीजें आपको प्रोत्साहित करेंगी। उगते सूरज की ड्राइंग या सींढरी पूर्व दिशा में ऊपर की ओर लगाएं।
सोनिया परियल, स्टे्रस स्पेशलिस्ट
हम साल भर पढ़ते हैं, लेकिन एग्जाम टाइम में सबकुछ याद रहते हुए भी वैसा लिख नहीं पाते, एंजाइटी लेवल के बढऩे के कारण ही यह होता है। दरअसल एग्जाम का डर इतना होता है, कि नर्वस सिस्टम ओवर एक्टिव हो जाता है। इसलिए हम अनईजी फील करते हैं। हम ऐसा फील करते ही क्यो हैं, कि एग्जाम में सफल नहीं तो जिंदगी खत्म। साइकेटरिस्ट को लोग पागलों का डॉक्टर कहते हैं। इमोशंस को डील करना काउंसलर बताते हैं। इमोशंस को मेडिकली ट्रीट करने का काम साइकेटरिस्ट का होता है। मन से गलत बातों को निकालकर सकारात्मक सोच रखना चाहिए।