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यहां आए बिना व्यर्थ है जगन्नाथ पुरी की यात्रा

9 वर्ष पहले
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रायपुर। महानदी पूरे छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदी है और इसी के तट पर बसी है राजिम नगरी। राजधानी रायपुर से 45 किलोमीटर दूर सोंढूर, पैरी और महानदी के त्रिवेणी संगम-तट पर बसे इस छत्तीसगढ़ की इस नगरी को श्रद्घालु श्राद्घ तर्पण, पर्व स्नान, दान आदि धार्मिक कार्यों के लिए उतना ही पवित्र मानते हैं जितना कि अयोध्या और बनारस को, मंदिरों की महानगरी राजिम की मान्यता है कि जगन्नाथपुरी की यात्रा तब तक संपूर्ण नहीं होती जब तक यात्री राजिम की यात्रा नहीं कर लेता।

अटूट विश्वास है कि यहां स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्युपरांत वह विष्णु लोक को प्राप्त करता है। भगवान शिव और विष्णु यहां साक्षात रूप में विराजमान हैं जिन्हें राजीवलोचन और कुलेश्वर महादेव के रूप में जाना जाता है।
वैष्णव सम्प्रदाय की शुरुआत करने वाले महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चम्पारण्य भी यहीं है। इसलिए यह स्थान खास हो जाता है।
भगवान शंकराचार्य के अनुसार कुंभ-पर्व का मेला मुख्यतः साधुओं का ही माना जाता है। साधु मंडली ही कुंभ का जीवन है। राजिम-कुंभ कई दिनों तक इसका साक्षी बनता है।
यहां पर आज से कुंभ पर्व शुरू हो रहा है। एक दर्जन से ज्यादा अखाड़ों के अलावा शाही जुलूस, साधु-संतों का दरबार, झांकियां, नागा साधुओं और धर्मगुरुओं की उपस्थिति कुंभ के आयोजन को सार्थकता प्रदान करेगी। राजिम-कुंभ सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केन्द्र बना है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने माघ पूर्णिमा के अवसर पर कल 25 फरवरी से शुरू हो रहे राजिम, शिवरीनारायण और सिरपुर के प्रसिध्द मेलों की सफलता के लिए अपनी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
डॉ. रमन सिंह ने राज्य के इन प्रसिध्द आस्था केन्द्रों के वार्षिक मेलों में लाखों की संख्या में आने वाले तीर्थ यात्रियों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कहा है कि मड़ई और मेले छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। भारतीय संस्कृति में हमारे अधिकांश तीर्थ नदियों के किनारे ही पुष्पित और पल्लवित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र संगम पर शुरू हो रहे राजिम के परम्परागत प्रसिध्द मेले को राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में आम जनता के सहयोग से उसकी सम्पूर्ण गरिमा के अनुरूप विकसित किया है, जिससे इसकी पहचान 'राजिम कुंभ' के रूप में होने लगी है। डॉ. सिंह ने कहा कि महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के पावन संगम पर शिवरीनारायण का प्रसिध्द मेला भी छत्तीसगढ़ के जन-जीवन में अपनी विशेष पहचान रखता है। इसी तरह सिरपुर के प्रसिध्द मेले (सिरपुर महोत्सव) का आयोजन भी महानदी के किनारे होता है। प्राचीन भारतीय इतिहास में छत्तीसगढ़ का यह ऐतिहासिक स्थान दक्षिण कोशल की राजधानी 'श्रीपुर' के नाम से भी पहचाना जाता है। सिरपुर में बौध्द, जैन, शैव और वैष्णव संस्कृतियों के प्राचीन स्मारक सामाजिक समरसता पर आधारित हमारी भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ाते हैं। उल्लेखनीय है कि राजिम कुंभ और शिवरीनारायण के वार्षिक मेले की 15 दिनों तक चलेंगे। महासमुंद जिले में महानदी के किनारे आयोजित हो रहे दो दिवसीय सिरपुर महोत्सव के प्रथम दिवस पर कल 25 फरवरी को जिला प्रशासन द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोह का भी आयोजन किया जाएगा।