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रात की सूचना गंभीरता से लिए होते, तो नहीं होता बलवा
रायपुर। ताजनगर में दो गुटों में मंगलवार को हुआ बलवा रोका जा सकता था। रात 2 बजे के बाद से जब इलाके के लड़कों के बीच झगड़ा हुआ तो पुलिस को सूचना दी गई। ताजनगर चौकी और सिविल लाइंस को सूचना देने के बावजूद अफसरों ने इसे हल्के में लिया। अफसर अगर रात में ही सक्रिय होकर इलाके में फोर्स तैनात कर देते तो शायद सुबह साढ़े आठ बजे बलवा की घटना नहीं होती। पुलिस के इस ढुलमुल रवैया को लेकर लोगों में आक्रोश है।
सुबह की घटना के बाद सिटी एसपी डा. लाल उमेद सिंह, एएसपी आईएच खान, डीएसपी अर्चना झा समेत तकरीबन 50 जवानों की फोर्स मौके पर पहुंची। उन्होंने भीड़ को अलग-अलग कर उन्हें खदेड़ा और स्थिति को काबू में किया। कुछ देर बाद एसपी ओपी पाल और बाद में आईजी जीपी सिंह भी घटनास्थल पहुंचे। तब तक 100 से ज्यादा पुलिस जवान वहां पहुंच चुके थे। आईजी सिंह ने सबसे पहले उस मकान का मुआयना किया, जहां बलवाइयों ने लूटपाट की। इस मकान की खिड़की को राड डालकर तोड़ा गया। दरवाजा तोड़कर भीतर से गहने-जेवर और दुकान की चीजें लूट ली गई। दुकान के मालिक जावेद रहमान ने आईजी को इसकी जानकारी दी। आईजी ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस गली से लगे कुछ अन्य मकानों में भी तोडफ़ोड़ किया गया। बाद में अफसर ने एक गुट के लोगों से मुलाकात की। वहां एक घायल युवक पहुंचा, जिसके सिर पर तलवार से वार किया गया था। आईजी ने उसे देखते ही अस्पताल ले जाने के निर्देश दिए। थोड़ी देर बाद वो दूसरे गुट की तरफ आए तो वहां हंगामा शुरू हो गया। लोगों की भीड़ को पुलिस ने बड़ी मुश्किल से संभाला। दोनों गुटों के जिम्मेदार वरिष्ठजनों से कहकर भीड़ हटवाई गई। बाद में उन्हें समझाईश दी गई। तकरीबन दो घंटे तक पूरा घटनाक्रम चलता रहा। दोनों गुटों के लोगों ने उनसे एक जैसी शिकायत की जिसमें कहा गया कि पुलिस को रात में ही मारपीट की सूचना दी गई थी, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।
थाना छोड़ो, एसपी से क्यों नहीं की शिकायत- आईजी
एक गुट के घायल महिलाएं और युवकों ने जब आईजी जीपी सिंह को यह बताया कि इस मारपीट की उन्होंने पुलिस चौकी और सिविल लाइंस थाने में सूचना दी थी। बावजूद इसके किसी ने ध्यान नहीं दिया, तो आईजी ने उन्हें कहा कि थाने में जब किसी ने नहीं सुना तो एसपी से क्यों शिकायत नहीं की। यह सुनते ही लोग गुस्से में आ गए। उनका तर्क था कि क्या थाना और एसपी अलग-अलग हैं। क्या किसी मारपीट की शिकायत के लिए अफसरों के चक्कर काटने पड़ेंगे? चौकी और थाने को जब सूचना दी जा रही है तो वो इसे क्यों हल्के में ले रहे? पुलिस ने देर शाम तक पुलिस की इस लापरवाही के लिए किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
महीनेभर से खराब कैमरा, ऐहतियात की उड़ी धज्जियां
रायपुर शहर में ताजनगर का यह इलाका पिछले कई सालों से सबसे संवेदनशील माना जाता है। यहां कई बार बलवा और सांप्रदायिक लड़ाइयां हो चुकी हैं। पुलिस ने इस वजह से यहां एक चौकी खुलवाई और उपद्रवियों पर निगरानी रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए। ये कैमरे खराब पड़े हैं। महीनेभर से इसमें किसी तरह की रिकार्डिंग नहीं हुई। मारपीट में घायल लोगों ने पुलिस से इसकी लिखित तक में शिकायत की है। इस संवेदनशील मोहल्ले में पुलिस की इस लापरवाही के कारण ही मंगलवार को विवाद ने विकराल बलवा का रूप ले लिया। अगर ऐहतियात गंभीरता से बरती जाती तो शायद झगड़े नहीं होते।
पुलिस चौकी के सामने दबंगई से गाड़ा झंडा
ताजनगर चौक में ठीक पुलिस चौकी के सामने एक गुट ने अपना झंडा गाड़ रखा है। इस पर दूसरे गुट को आपत्ति है। पिछले बार के बलवा में ऐसे झंडे लगाने को लेकर प्रतिबंध के तहत समझौता हुआ था। बावजूद इसके एक गुट ने झंडा लगाया लेकिन पुलिस ने इस पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया। चौकी के सामने बाकायदा झंडा लगाने के लिए गोला आकार का सीमेंट का चौक भी बनाया गया, लेकिन पुलिस इस निर्माण को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। इतना ही नहीं चौकी में छोटे-मोटे झगड़ों की भी शिकायतें होती रहीं, लेकिन अफसर इसे हल्के में लिए। यही विवाद धीरे-धीरे बढ़ते गए और बलवा की नौबत आ गई।