डीएनए से हेल्दी मैरिड लाइफ की जांच
सिटी रिपोर्टर.रायपुर
हैप्पी मैरिज के लिए मैरिड लाइफ का हेल्दी होना भी बेहद जरूरी है। इसलिए डॉक्टर अब शादी के पहले मेडिकल हॉरस्कोप मैच कराने की सलाह दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में चल रही बायोइंफोमेटिक्स वर्कशॉप में मंगलवार को एक्सपर्ट ने बताया कि डीएनए टेस्ट के जरिए हेल्दी मैरिड लाइफ के राज पता किए जा सकते हैं।
शादी के बाद सेहत को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी तब आती है, जब आप फैमिली प्लान करते हैं। मदर और होने वाले बच्चे को रिस्क से बचाने के लिए शादी के पहले ही डीएनए टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि शादी हेल्दी होगी या नहीं। डॉक्टरों ने कहा कि फैमिली में जेनेटिक डिसऑर्डर का केस होने या अन्य कोई बीमारी के रिस्क के लिए शादी के पहले यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
इस तरह होता है टेस्ट
हर व्यक्ति के शरीर में 46 क्रोमोजोम होते हैं जो 23 पेयर में रहते हैं। इनमें से 22 पेयर सामान्य होते हैं, लेकिन तेइसवां पेयर मेल और फीमेल जेंडर तय करने वाला एक्स और वाय क्रोमोजोम होता है। बच्चा में मां और पिता के एक-एक जीन आते हैं। एक्स और वाय क्रोमोजोम के माध्यम से जीन के साथ कई बीमारियों के ट्रेट और डिसीज भी बच्चे में कैरी हो जाती है। मां और बच्चे का डीएनए टेस्ट करके जांचा जाता है कि उनमें ट्रेट या बीमारी कैरी करने वाले कितने जीन है और इन दोनों जीन के कंबिनेशन का क्या असर होगा। अगर लड़का और लड़की दोनों के जीन सिकलसेल, थैलीसिमिया या ऑटो जोनल रेसेसिव और जेनेटिक बीमारियों के ट्रेट या डिसीज वाले हैं, तो यह तय है कि बच्चे को भी यह परेशानी होगी। ऐसे में उन्हें शादी नहीं करने की सलाह दी जाती है। लेकिन थैलीसिमिया और सिकलसेल के केस में अगर लड़के या लड़की में से कोई एक नॉर्मल है, तो बच्चे में बीमारी नहीं होगी, ट्रेट होने के चांस भी बहुत कम होंगे। इसी तरह मां के जीन में हीमोफीलिया या मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के जीन है और न्यू बॉर्न मेल है, तो इन दोनों डिसऑर्डर के चांस ज्यादा होते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंसी के पहले प्रिकॉशन, बच्चे का गर्भ में ही मेडिकल तकनीक से ट्रीटमेंट या फिर मेडिकल रीजन से प्रेग्नेंसी टर्मिनेट की जा सकती है। इसी तरह शादी के पहले डीएनए टेस्ट कराकर परफेक्ट और हेल्दी पेयर के साथ हैप्पी मैरिड लाइफ जी जा सकती है।