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तुरतुरिया में बही खून की नदी, हजारों बकरों को काटा गया

8 वर्ष पहले
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के कसडोल तहसील में तुरतुरिया गांव चर्चा में है। यहां पर हर साल होने वाले पौष मेले में पशुओं की बलि चढ़ाई जाती है। इस पर कई साल से प्रतिबंध लगा हुआ है, बावजूद इसके बलिप्रथा बदस्तूर जारी है। लोग मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के बाद उसके आसपास जाकर पशुओं की बलि चढ़ा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक तीन दिनों के दौरान यहां पर छह हजार से अधिक बकरों को काटा जा चुका है।

तुरतुरिया एक ऐतिहासिक स्थल है जो मुख्यत: लवकुश की राजधानी के रूप में जाना जाता है। महर्षि वाल्मिकी का आश्रम भी यहां पर स्थि​त है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा होती है यहां की देवीमंदिर की। यहां पर हर साल एक मेला भरता है जिसमें हजारों की संख्या में लोग देवी दर्शन करने आते हैं।

आगे देखिए तुरतुरिया मेले की एक्स्क्लूसिव तस्वीरें और पढ़िए क्या है यहां की मान्यताएं