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हम लोग को कुछ हो जाता तो, पढि़ए चार बहादुर बच्चों की कहानी?

8 वर्ष पहले
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रायपुर. मां किचन में खाना बना रही थी तभी छोटा भाई रोने लगा तो मां जलता गैस छोड़कर भाई को सुलाने कमरे में चली गई। मैं किचन में देखी तो गैस चूल्हा के पास गिरा तेल के कारण आग भभकने लगी। पहले तो मुंह से हवा फूंक कर बुझाने की कोशिश की फिर जल्दी से एक कपड़ा लेकर आई और उससे आग बुझाने लगी, जब आग नहीं बुझा तो दौड़कर बाहर से दादी को बुला लाई और दादी ने तुरंत रेग्युलेटर बंद करके आग में काबू पाया।


आठ वर्ष की मासूम-सी बच्ची मानसी पांडेय ने 16 जून 2013 को प्रोफेसर कॉलोनी स्थित अपने घर में घटे खौफनाक मंजर को जब बयां किया तो उसकी आंखों में खौफ साफ नजर आ रहा था, लेकिन इस बच्ची के बुलंद हौसले की वजह से उसने अपने परिवार को बचा लिया। आग से डर न लगने के सवाल पर बड़ी मासूमियत से मानसी ने जवाब दिया कि अगर मैं आग बुझाने की कोशिश नहीं करती तो हम लोग को कुछ हो जाता तो?


प्रेस क्लब द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मीडिया के सामने कुछ इस तरह से पूरी घटना क्रम को मानसी ने बयां किया। सिर्फ मानसी ही नहीं ऐसे ही अन्य तीन और बच्चों को उनकी बहादुरी के लिए गणतंत्र दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ राज्य वीरता पुरस्कार मिलने वाला है, जिसमें सबसे छोटी मानसी पांडेय ही है।

इस आयोजन में राज्य वीरता पुरस्कार पाने वाले बच्चों ने अपने बहादुरी के किस्से सुनाए।पढ़िए आगे