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डाउनलोड करेंरायपुर. छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स में राजनीति विवादों के बीच चेंबर अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी ने अपना पूरा कामकाज चेंबर के कार्यकारी अध्यक्ष अमर धावना को सौंप दिया है। उन्होंने चेंबर कार्यालय जाना भी बंद कर दिया है। नीतिगत के फैसलों पर ही अब उनकी सहमति ली जा रही है। बाकी सारे काम कार्यकारी अध्यक्ष ही संभाल रहे हैं।
चैंबर अध्यक्ष सुंदरानी ने दैनिक भास्कर को बताया कि रायपुर उतर विधानसभा का विधायक बनने के बाद उनके पास समय की कमी हो गई है। विधानसभा के दूसरे कामों में व्यस्त होने की वजह से वे चेंबर में ज्यादा समय नहीं दे पा रहे थे। इस वजह से उन्होंने अपना काम काज कार्यकारी अध्यक्ष को सौंप दिया है। चेंबर की ओर से कोई भी अधिकृत बयान जारी करने और दूसरे फैसलों के लिए कार्यकारी अध्यक्ष धावना को अधिकृत किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों के हितों के लिए वे हमेशा संघर्ष करते रहेंगे। चेंबर का कोई भी व्यापारी उनसे किसी भी समस्या के लिए सीधे संपर्क कर सकता है।
चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा से ज्यादा बवाल
चेंबर अध्यक्ष सुंदरानी ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे चेंबर अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस फैसले के बाद से ही चेंबर में घमासान मचा हुआ है। चेंबर अध्यक्ष के प्रमुख दावेदारों ने अभी से अपने प्रचार-प्रसार की शुरुआत कर दी है। फिलहाल यह माना जा रहा है कि चेंबर अध्यक्ष सुंदरानी किसी एक नाम पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी यह मुहिम सफल होती है तो सुंदरानी पैनल से अमर धावना या जितेंद्र बरलोटा का अध्यक्ष बनना तय है।
जातिगत समीकरण भी बनने लगे
चेंबर चुनाव के लिए चेंबर के 12 हजार सदस्य सीधे मतदान करेंगे। इनमें पांच हजार से ज्यादा सिंधी समाज के वोट हैं। ऐसे में सुंदरानी पैनल से अमर धावना की दावेदारी सबसे मजबूत है। सिंधी समाज के बाद अग्रवाल समाज का चेंबर में दबदबा है। छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल का पैनल चुनाव में उतरता है तो मुकाबला रोचक हो जाएगा। सिंधी समाज के उम्मीदवार को कड़ी टक्कर देने के लिए एक गुट छत्तीसगढ़ कैट के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष ललित जैसिंघ को भी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है।
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