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बीच शहर में घुस आया तेंदुआ, जंगली जानवरों से परेशान छत्तीसगढ़

8 वर्ष पहले
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रायपुर। विकास की दौड़ में तरक्की करते शहर और गांवों ने जंगलों को लगातार खत्म किया है। छत्तीसगढ़ के गांवों में जंगली जानवरों का घुस आना कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन जब शहर के बीचोंबीच खतरनाक जंगली जानवर आकर उत्पात मचा दे तो सोचना लाजिमी है। मामला कांकेर शहर का है जहां दिनदहाड़े एक तेंदुआ घुस आया, इससे पूरा शहर अवाक रह गया। जंगल से निकलकर एक तेंदुआ शहर में कूदफांद मचाने लगा। इससे पूरे शहर मे दहशत फैल गयी और प्रशासन को आनन फानन में धारा 144 लगानी पड़ी। तेंदुआ को पकडऩे के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, कई टीमें लगाई गईं, इस दौरान लगभग 14 लोग घायल हुए।

ओडि़सा सीमा से लगे कई ऐसे जिले हैं जहां पर कि जानवर भारी उत्पात मचा रहे हैं। इनमें हाथी का खौफ भयंकर है। एक दंतैल हाथी तो पिछले दो साल से ग्रामीणों की फसलें चौपट कर रहा है और यह अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। जशपुर जिले में पिछले महीने एक हाथी घर में छिपी महिला को मारने पर आमादा हो गया था, उसने मिट्टी के बने कच्चे घरों को तोड़ डाला। नक्सल आतंक से जूझ रहे राज्य में जानवरों का आतंक लोगों का जीना दूभर कर रहा है।


पिछले दस साल में सिर्फ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में जंगली हाथी एक हज़ार लोगों को मार चुके हैं. इसी अवधि में सिर्फ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में एक सौ सत्तर से ज्य़ादा हाथी भी मारे जा चुके हैं। वन विभाग की रिपोर्ट में पिछले दस साल में लगभग तीस हाथियों के मरने की बात कही गई है, वहीं झारखंड के प्रमुख वन संरक्षक के अनुसार ये तादाद सत्तर से ऊपर है। बीते साल 8 अगस्त को ओडिशा के वन मंत्री बिजयश्री राऊतरे ने विधानसभा को बताया था कि पिछले दस साल में प्रदेश में मरने वाले हाथियों की संख्या 71 है। इनमें से ज्यादातर हाथी वो हैं जो जंगलों से निकलकर कस्बाई सीमा में घुस आए। लोगों ने परेशान होकर इन्हें कई तरीकों से मार डाला। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय मानता है कि झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में तीन हज़ार से ज्यादा हाथी हैं और ये गलियारा सदियों पुराना है।