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8 वर्ष पहले
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रायपुर। राजधानी में युवाओं का एक समूह नौनिहालों के भविष्य को संवार कर तस्वीर बदलने में लगा है। जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने के साथ उनमें संस्कार और शिष्टाचार के भी बीज डाले जा रहे हैं। सप्ताह में तीन दिन शाम को दो घंटे के लिए 150 बच्चे रामकुंड क्षेत्र के एक मंदिर में इकट्ठा होते हैं। हॉल और बरामदे में क्लास लगती है। इसका असर भी दिखने लगा है, जो बच्चे पढ़ाई से दूर भागते थे अब बिना कहे खुद किताब-कॉपी लेकर बैठ जाते हैं।
भास्कर को जानकारी मिली कि अलग-अलग फील्ड में काम कर रहे कुछ युवा राजधानी के एक क्षेत्र में बदलाव लाने में लगे हैं। उनके प्रयास का असर वहां के नौनिहालों में दिखने लगा है। इस पर भास्कर टीम रामकुंड स्थित ठाकुर लक्ष्मीनारायण मंदिर पहुंची। देखा शाम के समय हॉल में पर्दे लगाकर चार कक्षाएं चलाई जा रही है। युवाओं का एक समूह इन्हें पढ़ाने में लगा है। अंदर गए तो खुले में चमचमाती दुधिया रोशनी में ब्लैक बोर्ड के सामने बैठे बच्चे भी पढ़ाई में तल्लीन थे। एक ओर 18 साल का एक युवक 15 बच्चों को पढ़ा रहा था तो पास की क्लास में छात्रों को उदाहरण देकर न्यूट्रान के बारे में समझाया जा रहा था। कहीं संस्कार और बड़ों को सम्मान देने की सीख दी जा रही थी तो कहीं दिनचर्या में उपयोग होने वाले शब्दों के बारे में।
टीम ने बच्चों से जानना चाहा कि आखिर इस क्लास से उनमें क्या बदलाव आया। उत्साह और आत्मविश्वास से बताया, पढ़ाई के प्रति लगाव हुआ है। पहले वे बच्चे स्कूल जाने और पढऩे के नाम पर बाहर भाग जाते थे। यहां पांच साल के बच्चे से लेकर 16 साल तक के किशोर आ रहे हैं। इसके बाद टीम बच्चों के माता-पिता से मिली। उनके आंखों में आंसू आ गए। कहने लगे, चार महीने पहले जिस बच्चे को पढ़ाई के लिए कहने पर बस्ता फेंककर रात-रात भर बाहर घूमता था, वह आज बिना बोले पढऩे बैठ जाता है। उन्हें पता है कि भविष्य में क्या बनना है।
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