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डाउनलोड करेंसुदीप त्रिपाठी, रायपुर। पांच परिवार, महिलाएं और बच्चे भी...उन्हें कहा गया कि वो नौकरी देंगे। काम करवाएंगे और घर भी मिलेगा। रायपुर और बिलासपुर से जब यह परिवार झारखंड के रामगढ़ के एक छोटे से गांव में पहुंचा तो उन्हें कैद कर लिया गया। फिर उनकी पिटाई कर उनसे काम करवाया गया। चार महीने तक बंधवा मजदूर रहे सभी 22 मजदूरों को सोमवार सुबह वहां की पुलिस ने आखिरकार छुड़ा लिया।
छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर जिले में रहने वाले 22 बंधवा मजदूरों को झारखंड में छुड़ा लिया गया। उन्हें वहां के ईंट भट्ठे में चार महीने से बंधक बनाकर काम करवाया जा रहा था। वहां का एक मजदूर भागकर झारखंड के रामगढ़ जिले के एसपी के पास पहुंचा। उसकी सूचना पर फिर दोनों ईंट भट्ठों में दबिश दी गई और छग के 22 मजदूरों को छुड़ा लिया गया। छुड़ाए गए मजदूरों में लक्ष्मी नारायण, रूकमणि, अनिल, श्रीचंद्र, बबीता, सुरेश, प्रीति, बिजेंद्र, लता, रामफुल, लता, जया बाई, रामकुमार, मनीषा, राम नारायण, उतरी बाई, ईशा कुमारी, राजेंद्र कुमार और सुरेश कुमार शामिल हैं।
सभी मजदूरों को झारखंड से छत्तीसगढ़ लाया जा रहा है।
उन्हें यहां के बिलासपुर के मस्तुरी थाना क्षेत्र और रायपुर के भाटापारा इलाके के एक गांव का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक झारखंड के मांडू थाना के बोंगाहारा में दोनों ईंट भट्ठे संचालित थे। वहां काम करने गए 22 मजदूरों को बहला-फुसलाकर वहां रखा गया और उन्हें तगड़े सुरक्षा घेरे में घेर लिया गया। इसके बाद ईंट भट्ठे का मालिक शंकर मेहता, बंगाली मेहता, अशोक महातो और अरविंद महातो ने उन्हें बंधक बना लिया।
रामगढ़ के एसपी रंजीत प्रसाद ने बताया कि बंधक बने मजदूरों में से सुरेश नामक एक मजदूर भागकर उनके दफ्तर पहुंचा था। उसने बताया कि एक महिला दलाल के सहयोग से 22 मजदूरों को तीन महीने पहले झूठे प्रलोभन देकर छत्तीसगढ़ से मांडू ले जाया गया था। वहां तीन महीने काम करने के बाद भी उन्हें मजदूरी नहीं दी गई। जब उन लोगों ने पैसे मांगे तो सभी के साथ मारपीट भी की गई और बंधक बना लिया गया। मांडू के जेएसबी मार्का वाले ईंट भट्ठे में न तो उन्हें एडवांस पैसे दिए गए और न ही मजदूरी दी गई। केवल खाना खिलाकर उनसे काम करवाया जा रहा था।
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