पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कांग्रेसियों को नक्सली गोलियों से भूनते रहे... और ये नेता करते रहे सेटिंग

कांग्रेसियों को नक्सली गोलियों से भूनते रहे... और ये नेता करते रहे सेटिंग

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

रायपुर. झीरमघाटी कांड शायद... कोई न भूल पाए। नक्सली कांग्रेस के दिग्गज नंद कुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ला, महेंद्र कर्मा जैसे नेताओं को गोलियों से भूनते रहे और उनके ही नेता इधर... नक्सलियों से सांठगांठ में लगे रहे। जी हां... यह चौंकाने वाला खुलासा रायपुर पुलिस का है। एडीजी इंटेलिजेंस मुकेश गुप्ता ने बद्री गौड़े नामक एक नक्सली को गिरफ्तार कर बताया कि वह अंतागढ़ का पूर्व ब्लॉक कांग्रेसी है। इस नेता ने नक्सलियों की ओर से काम करते हुए कांग्रेस से अंतागढ़ विधानसभा के टिकट की दावेदारी भी की थी।


एडीजी इंटेलिजेंस श्री गुप्ता ने बताया कि कांकेर जिले के अंतागढ़ का पूर्व ब्लॉक कांग्रेस उपाध्यक्ष तथा तरोकी गांव के बद्री गौड़े को नक्सलियों के मददगार होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। बद्री गौड़े रावघाट संघर्ष समिति का संयोजक भी है। एडीजी इंटेलिजेंस मुकेश गुप्ताने सोमवार की शाम प्रेस कांफ्रेंस में खुलासा किया कि गौड़े छत्तीसगढ़ की लाइफ लाइन कहलाने वाले रावघाट रेल प्रोजेक्ट के खिलाफ साजिश कर रहा था। उसने दिल्ली में जेएनयू की एक प्रोफेसर तथा कई एनजीओ को जंगल ले जाकर नक्सलियों से मिलवाया था।


एडीजी गुप्ता  ने बताया कि बद्री के बारे में आरोपी कारोबारी धमेंद्र और नीरज चोपड़ा से पूछताछ में पता चला है। वह उनके साथ मिलकर काम किया करता था। बद्री गौड़े को नक्सलियों ने ही रावघाट रेल परियोजना का विरोध करने के लिए तैयार किया था। वह उनके कहने पर रावघाट जिला संघर्ष समिति की संस्था बनाई। इसके जरिए उसने हाथ से लिखे पंपलेट छपवाए और रावघाट क्षेत्र से लगे गांवों में बंटवाए थे। वह रेल परियोजना के खिलाफ नक्सलियों के साथ मिलकर साजिश रच रहा था। बद्री ने ब्लॉक कांग्रेस का उपाध्यक्ष होने के नाते अंतागढ़ से विधानसभा चुनाव में टिकट की भी दावेदारी की थी। हालांकि उसे टिकट मिली नहीं और वह काम करता रहा। एडीजी गुघ्ता के मुताबिक बद्री ने जेएनयू की एक महिला सोशियोलॉजी प्रोफेसर को छत्तीसगढ़ बुलवाकर जंगल में नक्सलियों से मिलवाया था। इसके अलावा वह कई एनजीओ और एक्टिविस्ट को भी लेकर जंगल में नक्सलियों तक जा चुका है। उसने कई व्यापारियों से भी मुलाकात करवाई, जिन्होंने नक्सलियों की मदद की और उनसे मदद मांगी भी।

छग क्लब का कोई कनेक्शन नहीं- एडीजी

एडीजी गुप्ता ने कहा कि किसी भी नक्सली का छत्तीसगढ़ क्लब से कोई लेना-देना नहीं है। यह बात गलत है। न तो ऐसा कोई तथ्य पूछताछ में सामने आया और न ही इंटेलिजेंस के किसी भी अधिकारी ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि नक्सल कमांडर प्रभाकर और दूसरे नक्सलियों के रायपुर आकर इलाज कराने की बात सही है, लेकिन किसी भी डाक्टर के जंगल जाकर इलाज करने की बात सामने नहीं आई।