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लोगों ने पढ़ी गांधी पर आधारित 1000 दुर्लभ पुस्तकें

7 वर्ष पहले
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रायपुर. महज आठ इंच की सबसे छोटी और पतली किताब हो या लगभग 50 इंच की सबसे बड़ी और मोटी किताब। सिर्फ 60 पेज की किताब हो या सैकड़ों पेज की किताब। महात्मा गांधी पर आधारित ऐसे कई दुर्लभ पुस्तक गुरुवार को गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर देखने का मौका मिला। साइंस कॉलेज द्वारा आयोजित गांधी पर आधारित दुलभर््भ पुस्तकों की यह 24वीं प्रदर्शनी थी। जिसमें गांधी द्वारा रचित व गांधी पर लिखित लगभग 1000 किताबों को देखने और पढऩे का मौका मिला। इस प्रदर्शनी में न केवल कॉलेज स्टूडेंट्स बल्कि गांधी साहित्य प्रेमी भी पहुंचकर न केवल किताबें देखी, बल्कि इत्मीनान से किताबें पढ़ी भी। इस प्रदर्शनी में 1948 से 2013 की पुस्तकें देखने को मिली।


आज का विचार: जब भी कुछ अच्छा विचार आया उसे महात्मा गांधी ने लिख लिया और आज का विचार नाम से ये पुस्तक प्रकाशित भी हुई। प्रदर्शनी में रखी गई सबसे छोटी पुस्तक में एक आज का विचार नामक किताब भी है, जो अब आउट ऑफ प्रिंट है। इसमें जनवरी से लेकर दिसंबर तक के विचार है। सबसे बड़ी किताब वाराणसी से प्रिंट हुई है। जिसे पन्नालाल त्रिपाठी ने लिखा है। 60 पेज की इस किताब का हर एक पन्ना काफी मजबूत और मोटा है। इसमें लिथो प्रिंट यानी पत्थर पर इंक लगाकर एक्सप्रेशन लेकर फिर प्रिंट की गई फोटो छपी है। सबसे पहले ये पुस्तक 1949 में प्रकाशित हुई फिर दोबारा 1970 में प्रकाशित हुई।


बाबू के पत्र भी: बाबू के स्व. जमनालाल बजाज से काफी अच्छे संबंध थे। महात्मा गांधी ने स्व. जमनालाल बजाज को जो भी पत्र लिखा उसे बापू के पत्र के नाम से किताब के रुप में प्रकाशित किया गया। जो इस प्रदर्शनी में देखने का मौका मिला। इन सबके अलावा गांधी वाडमय नामक किताब 25 खंड में प्रकाशित हुई, जिसमें पूरी 25 किताबें भी प्रदर्शनी में नजर आई। इसके अलावा गांधी दर्शन, गांधी मार्ग नामक शोध पत्रिका के अंक, गांधी के प्रेरक प्रसंग, आटोबायोग्राफी, गांधी मार्ग, ब्रह्मचर्य, ग्राम सेवा, व्रत विचार जैसे किताबें भी नजर आई।