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डाउनलोड करेंरायपुर। विकासनगर गुढिय़ारी में चल रही भागवत कथा में गुरुवार को उमाशंकर महाराज ने कहा कि भगवान के भक्त अगर पौधरोपण करें तो प्राकृतिक विपदा नहीं आएगी। भगवान की भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए।
कथा के पांचवें दिन महाराज ने नवधा भक्ति पर कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि नवधा भक्ति में से हमारा जरूरी काम प्रकृति को प्रदूषित होने से बचाना भी है। आज लोग धर्म को केवल पूजा-पाठ व कर्मकांड तक सीमित कर रखे हैं। उनके चारों ओर क्या हो रहा है, उससे कोई लेना-देना नहीं रह गया है। प्राकृतिक आपदा भूकंप, सुनामी, बाढ़, महामारी, अत्यधिक ठंड व गर्मी मानव की देन है। अंधाधुंध पेड़ों की कटाई व भौतिक सुख-सुविधा के लिए अत्याधुनिक मशीनों के उपयोग से प्रकृति दूषित हो रहा है। भक्त भगवान की भक्ति तो करे, इसमें कोई मनाही नहीं है। साथ में वे एक पौधे लगाने का संकल्प लें तो प्रकृति खिलखिला उठेगी।
भगवान राम व श्रीकृष्ण का अवतार समाज को सीख देने के लिए था, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि लोग अपने को राम व श्रीकृष्ण का भक्त बताते हैं, पर उनकी सीख को अमल में नहीं लाते। भगवान द्वारा बताए गए मार्ग से प्रकृति को संतुलित किया जा सकता है। इससे मानव समाज की रक्षा भी होगी।
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