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8 करोड़ का गबन और सजा सिर्फ तीन साल

7 वर्ष पहले
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रायपुर। सरकारी योजना के करीब आठ करोड़ रुपए गबन करने वाले क्लर्क राजेश सारथी को रायपुर की एक कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। जिला कोषालय रायपुर से जारी चैक को आरोपी ने बैंक से आहरित कराने के बाद हितग्राहियों के खाते में जमा करने के बजाए अपने पास रख लिए।
लाखे नगर निवासी आरोपी राजेश एकीकृत बाल विकास परियोजना में सहायक ग्रेड-3 था। 6 फरवरी 12 को जिला कोषालय रायपुर से आरोपी को 780363 रुपए का चेक मिला। आरोपी को इस चैक को बैंक से आहरित कराने के बाद उसे कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के खाते में जमा करना था। करीब 6.80 लाख रुपए उसे महिला लक्ष्मी बैंक में जमा करना था और एक लाख रुपए कार्यालय लेकर आना था। आरोपी ने न तो पैसे बैंक में ही जमा किए और न ही कार्यालय लेकर आए। बल्कि तबियत खराब होने के बहाना बताकर छुट्टी पर चले गए। यह पैसे उसे बाद में भी जमा नहीं किए। आरोपी के खिलाफ इस मामले में डीडी नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीष कुमार दुबे ने इस मामले में आरोप साबित होने पर आरोपी को तीन साल की सजा सुनाई है।

विस्फोटक पदार्थ रखने पर पांच साल की सजा


रायपुर। विस्फोटक पदार्थ रखने के आरोप में एक फर्म संचालक और उसके मैनेजर को रायपुर की एक कोर्ट ने पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है। आरोपी के गोडाउन से पुलिस ने 36 नग डेटोनेटर बरामद किया था।
खमतराई थाना के गोंदवारा स्थित अमर इंटरप्राइजेस के संचालक सुनील कुमार जैन और मैनेजर उपेंद्र सिंह को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार की कोर्ट में आज सजा सुनाई गई। खमतराई थाने के निरीक्षक संजय तिवारी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपियों के फर्म में विस्फोटक सामान रखा गया है। 17 अगस्त 2013 को दोपहर 12.05 बजे पुलिस ने गोंदवारा स्थित फर्म में दबिश दी। तब वहां फर्म के मैनेजर उपेंद्र सिंग मौजूद थे। पुलिस ने उनकी मौजूदगी में तलाशी ली। अलग-अलग जगहों से कुल 36 नग डेटोनेटर बरामद किया गया। इसका उपयोग विस्फोटक बनाने में किया जाता है। पुलिस ने उसे बरामद करने के बाद फर्म के संचालक और मैनेजर के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 के तहत मामला पंजीबद्ध कर गिरफ्तार किया। आरोप साबित होने पर आज सजा सुनाई गई। कोर्ट ने दोनों के खिलाफ पांच-पांच हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।