रायपुर। मेडिकल व डेंटल की ऑनलाइन काउंसिलिंग में गड़बड़ी करने वाला चिकित्सा शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया है। इस पर बवाल मचने के बाद अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि छह सितंबर की चयन सूची के अनुसार एडमिशन दिया जा सकता है। डिप्टी डीएमई डॉ. सुमीत त्रिपाठी ने बताया कि ऐसा हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के पीएस डॉ. आलोक शुक्ला ने डीएमई व डिप्टी डीएमई को जमकर फटकार लगाई है। इसके बाद अधिकारी सहमे हुए हैं। वे ऐसा रास्ता निकाल रहे हैं, जिससे बवाल भी थम जाए और किसी का अहित भी न हो।
तीसरे चरण की काउंसिलिंग में मेडिकल की सीटों के अलाटमेंट में हुई गड़बड़ी से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी निशाने पर आ चुके हैं। साफ्टवेयर में गड़बड़ी बताकर नौ स्टूडेंट के एमबीबीएस की सीट रद्द कर डेंटल की सीट दे दी गई। वहीं आठ उम्मीदवारों को रायगढ़ से निजी मेडिकल कॉलेज की सीट री-अलाट की गई है। यही नहीं चंदूलाल में एडमिशन व अलाट किए 53 उम्मीदवारों का एडमिशन रद्द कर दिया गया। इससे गुस्साए स्टूडेंट व परिजनों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया था। काउंसिलिंग प्रभारी व डिप्टी डीएमई त्रिपाठी को एक घंटे तक घेरे रखा। यही नहीं डीएमई प्रताप सिंह कार्यालय ही नहीं पहुंचे। प्रदर्शन करने वालों ने भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया।
गलती सुधारी गई, वरना कहीं का नहीं रहते
प्रदर्शन के दौरान डॉ. त्रिपाठी के तेवर देखने लायक थे। उनका कहना था कि बेशक हमसे गलती हुई है, लेकिन हमने समय रहते गलती सुधार ली है। 50 फीसदी से कम वालों को एडमिशन दे देते तो आयुष विवि नामांकन ही नहीं करता। इससे वे परीक्षा से वंचित हो जाते। स्टूडेंट ने कहा कि एमसीआई ने ओबीसी के लिए कट आफ 40 फीसदी तय की है, पर विवि क्यों नामांकन नहीं करता। इस पर त्रिपाठी बगल झांकने लगे।
15 से 17 तक ऑन द स्पॉट काउंसिलिंग
साफ्टवेयर की गड़बड़ी की आड़ ले रहे अधिकारी अब 15 से 17 सितंबर तक नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में ऑन द स्पॉट काउंसिलिंग करवाएंगे। इसे अपग्रेड चरण का नाम दिया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि जिनका अलाटमेंट अथवा एडमिशन रद्द हुआ है, उन्हें मौका मिल सकता है। हालांकि स्टूडेंट व परिजन इस आश्वासन को कोरी बकवास बता रहे हैं।