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चल रही थी फायरिंग और जवान मतदान दल को चुटकुले सुनाकर हंसा रहे थे

7 वर्ष पहले
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( PIC: नक्सलियों की फायरिंग का जवाब देता जवान, मतदानकर्मी को दे रहा सुरक्षा। )
रायपुर। अंतागढ़ उपचुनाव हो गया। मतदानकर्मियों का दल लौट रहा था। वो पीवी 89 से बेठिया के लिए जा रहे थे। अचानक एक विस्फोट हुआ और गोलियां चलने लगीं। मतदानकर्मी दल के लोग घबरा गए। साथ चल रहे बीएसएफ के जवान फौरन चिल्लाए- जो जहां है, वहीं लेट जाए। लगभग सब लेट गए और सबके साथ एक-एक जवान गोलियां चलाते हुए लेटा रहा। सभी बेहद घबराए हुए थे। अचानक कुछ जवान हंसने-हंसाने लगे। गोलियां भी चल रही थीं और चुटकुले भी। मतदानकर्मी दल के लोगों की धड़कन तो तेज हो ही गई थी, लेकिन चुटकुलों से हंसी भी नहीं रोक पा रहे थे। बस ऐसे ही फायरिंग के बीच हंसते-हंसाते दल को बचा ले आए बीएसएफ के जवान। उन्हें बिठाया और फिर चाय पिलाई। यह खुलासा किया मतदानकर्मी दल में शामिल पीठासीन अधिकारी ने।

अंतागढ़ उपचुनाव से लौटते वक्त मतदानकर्मी दल में पीठासीन अधिकारी जोगेंद्र प्रसाद फरदिया, सदस्य हरि केशव डडसेना, प्रदीप साहू, लेख राम ध्रुव और उलेश्वर प्रसाद थे। जोगेन्द्र बताते हैं कि रविवार की सुबह 11.45 बजे एक विस्फोट हुआ। धूल का गुबार उठने लगा और तड़ातड़ गोलियां चलने लगी। जवानों ने चिल्लाया- नक्सली हमला है। जो जहां है, वहीं लेट जाओ। सबकी धड़कनें बढ़ गईं। लगा, पता नहीं बचेंगे या नहीं। घर-परिवार की याद आने लगी। शायद जवानों ने हमारी हालत को समझ लिया। बस, इसके बाद एक से एक चुटकुले सुनाकर ऐसे माहौल में भी खूब हंसाया और हमारा तनाव दूर कर दिया। मन में चिंता बहुत थी, लेकिन डर खत्म-सा हो गया था। एक जवान इस दौरान घायल हो गया। उसका इलाज भी साथ-साथ ही चलता रहा। कुछ जवान ये भी कहते रहे कि नक्सलियों ने तो एक बम फोड़ा है। अगर आदेश आए तो हम अभी पूरी दिवाली मना लें।
इसके बाद चाय-नाश्ता

केशव कहते हैं कि नक्सलियों के कब्जे वाले किसी जंगल में चाय-नाश्ते की बात हम सोच भी नहीं सकते थे। करीब आधे घंटे जमीन पर लेटे रहने के बाद जब स्थिति सामान्य हुई, तो जवानों ने हमें सुरक्षित जगहों पर बैठा दिया। इसी दौरान बैकअप टीम आई और घायल जवान को बांदे के लिए रवाना किया गया। इस बीच हमारे लिए चाय-नाश्ते का इंतजाम होता रहा। मुठभेड़ और विस्फोट के बाद भी सारे लोग हंसते-हंसाते कांकेर के पीजी कालेज पहुंचे।
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