रायपुर। पीएस हेल्थ डॉ. आलोक शुक्ला के भारी दबाव के बाद गायनी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिता यदु को 17 माह से रूका वेतन दे दिया गया है। जबकि डॉक्टर ने इंप्लाई डॉटा फार्म जमा ही नहीं किया है। यही नहीं ट्रेजरी के अधिकारियों ने वेतन जारी करने पर कोई आपत्ति भी नहीं की।
संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिता यदु पिछले 17 माह से बिना वेतन लिए काम कर रही थी। इस संबंध में दैनिक भास्कर ने खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद डॉ. यदु बिफर गई थीं और उसने भास्कर संवाददाता पर अपनी छवि खराब करने का आरोप लगाया था। उसने यह भी दावा किया था कि वे संविदा में नहीं बल्कि प्रतिनियुक्ति पर हैं। भास्कर के पास जो दस्तावेज है, उसमें संविदा डॉक्टर हैं। डॉ. यदु ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से भी की थी।
डीन कार्यालय ने उन्हें 10 बार नोटिस दिया था। डॉ. यदु ने सभी नोटिस को लेने से इनकार कर दिया था। दरअसल उन्हें 10 साल पहले कॉलेज प्रबंधन ने सेवा समाप्ति का नोटिस दिया था। इसके बाद वे हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। तब से अब तक वे नौकरी कर रही हैं। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि डॉ. यदु इंप्लाई डॉटा फार्म इसलिए नहीं भर रही हैं, क्योंकि उनके वकील ने कह दिया है कि यह फार्म भरने पर उनकी नौकरी खत्म हो सकती है। इसी डर में वे पिछले सवा साल से बिना वेतन लिए ही नौकरी कर रही हैं।
क्यों जरूरी है इंप्लाई डॉटा फार्म ?
जब से ई-पेमेंट के माध्यम से वेतन दिया जा रहा है, सभी कर्मचारियों को इंप्लाई डॉटा फार्म भरना पड़ता है। यह फार्म भरकर ट्रेजरी कार्यालय वाले मुंबई मुख्यालय भेजते हैं। फिर वहां से एक विशेष नंबर जारी होता है। यह नंबर जारी होने के बाद वेतन खाता में जमा होता है।
7.70 लाख का भुगतान
डॉ. यदु को 17 माह का वेतन एकमुश्त उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया है। कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार वेतन के रूप में उन्हें प्रति माह 50 हजार रुपए के हिसाब से साढ़े 8 लाख रुपए दिया जाना था। 80 हजार रुपए टीडीएस काटकर 7 लाख 70 हजार रुपए भुगतान किया गया।
पीएस हेल्थ का दबाव था- डीन
डीन डॉ. एके चंद्राकर का कहना है कि भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद उन्हें पीएस हेल्थ डॉ. शुक्ला का फोन आया था। वे डॉ. यदु को लंबे समय से वेतन नहीं देने से भी नाराज थे। उन्होंने नियम को शिथिल करते हुए तत्काल वेतन भुगतान करने को कहा। डीन ने कहा कि नोटशीट में पीएस हेल्थ के मौखिक आदेश के बाद वेतन जारी करने की बात लिखी गई है।