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बॉलीवुड की फिल्में देख सीखी हिंदी, अब छत्तीसगढ में सीख रहे बागवानी

7 वर्ष पहले
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रायपुर। छत्तीसगढ के राजनांदगांव जिले में अफगानिस्तान के तीन छात्र हार्टिकल्चर की पढाई कर रहे हैं। यहां आने से कुछ महीनों पहले तक तीनों को हिंदी बिल्कुल भी नहीं आती थी और न ही उन्हें अंग्रेजी का कोई खास ज्ञान था। भाषायी कठिनाई दूर करने के लिए तीनों छात्रों ने बॉलीवुड फिल्में देख हिंदी बोलना और समझना सीखा। भारत आने से पहले तक उनकी यह प्रैक्टिस चलती रही। अगस्त में यहां आने के बाद उन्होंने टूटी फूटी हिंदी बोलना सीख लिया। अब इसी के सहारे वे कक्षा में प्रोफेसर्स की बातें समझ रहे हैं।

इंडो-अफगान फैलोशिप प्रोग्राम के तहत हार्टिकल्चर की पढ़ाई करने आए अफगानी छात्र शेरजाद नासिरी, सरदार सरदारी और खालिद अदिदी मूलत: काबुल के रहने वाले हैं। उन्हें बीएससी फस्र्ट ईयर में दाखिला मिला है। वे नियमित रूप से क्लासेस अटैंड कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपने देश के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में वे मैनेजमेंट का काम देखते हैं। इसी से भारत में बाग-बगीचों और फल-सब्जियों तथा उसके उत्पादन के तरीकों को समझने की इच्छा जगी। फिर क्या था उन्होंने आवेदन किया और सलेक्शन हो गया। इस प्रोग्राम के तहत तकरीबन 20 से 22 छात्र भारत में पढ़ाई कर रहे हैं। हार्टिकल्चर के लिए इन तीनों का सलेक्शन हुआ है। फिलहाल बख्शी स्कूल परिसर में इसकी कक्षाएं लगती हैं। भर्रेगांव नर्सरी को प्रैक्टिकल के लिए तैयार किया गया है।
कॉलेज के प्रोफेसरों ने बताया कि भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों के पुर्ननिर्माण की पहल हुई है। वहीं भारत की उन्नत कृषि और उद्यानिकी व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

प्रोफेसर कर रहे मदद
अफगान से आए छात्रों को हिन्दी को लेकर दिक्कतें तो रही हैं, लेकिन प्रोफेसर उन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं ताकि कृषि के भारतीय तरीकों से वे अवगत हो सकें। - प्रशांत दुबे, डीन,हार्टिकल्चर कॉलेज

तकनीक सीखकर करेंगे प्रयोग
यहां की तकनीक सीखकर अपने देश अफगानिस्तान में इसका प्रयोग करेंगे। फिलहाल बीएससी पास करना टारगेट है। सबकुछ अच्छा रहा तो इसी कॉलेज से मास्टरी की डिग्री भी लेंगे। हालांकि उसके लिए हमारा दोबारा चयन होना जरूरी है।- , अफगानी छात्र

भारतीय दूतावास से होता है चयन
इस फैलोशिप प्रोग्राम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का योगदान है। काबुल स्थित भारतीय दूतावास से इन छात्रों का चयन इंडिया में पढ़ाई के लिए हुआ है, जिसके तहत वे देश और प्रदेश की परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अब तीनों ही छात्र राजनांदगांव से बीएससी की डिग्री लेकर लौटेंगे। छात्रों के रहने, भोजन और पढ़ाई का खर्च भारत सरकार की ओर से छात्रवृत्ति के रूप में दी जाएगी।