(फोटो: सिम्स बिलासपुर)
रायपुर/बिलासपुर। प्रदेश अभी नसबंदी कांड की काली छाया से उबरा भी नहीं था कि यहां बच्चों की लगातार मौत से हडकंप मच गया है। बिलासपुर के सरकारी अस्पताल में आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में एक सप्ताह में 15 बच्चों ने दम तोड़ दिया है। 10 गंभीर बच्चों का यहां इलाज किया जा रहा है, उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। ये सभी शिशु प्रदेश अंचलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से रिफर करके यहां भेजे गए थे।
पीएचसी में प्राथमिक उपचार भी नहीं
सिम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें से नौ इतने गंभीर थे कि रिकवर नहीं कर सके। जमीनी हालात यह हैं कि स्वास्थ्य केंद्रों में गंभीर बच्चों के प्राथमिक उपचार के भी इंतजाम नहीं हैं, इससे बीमार अवस्था में इन्हें रिफर करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता। स्वास्थ्य केन्द्रों से बच्चों को सीधे सिम्स रेफर कर दिया जाता है। यहां भी शिशु वार्ड और एनआईसीयू की स्थिति ठीक नहीं है। इसी का नतीजा है कि एक के बाद एक इतने बच्चों की मौत हो गई।
गौरतलब है कि प्रदेश में शिशु मृत्यु दर देश की राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यहां पैदा होने वाले हर 1000 बच्चों में 48 बच्चों की मौत हो जाती है जबकि राष्ट्रीय औसत 44 का है। प्रदेश में 33 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।
नई यूनिट पांच साल से बंद, पुरानी में क्षमता से ज्यादा शिशु भर्ती
सिम्स में मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग के निर्माण के समय ही अन्य वार्डों से दूर नियोनेटल इंसेंटिव केयर यूनिट (NICU) बनवाया जा चुका है, लेकिन पांच साल बाद भी उसे शुरू नहीं किया गया है। दूसरी तरफ वर्तमान में जो एनआईसीयू संचालित है उसमें 12 बच्चों के इलाज की ही व्यवस्था है लेकिन अभी वहां 40 बच्चों को रखा गया है। नियमों के अनुसार एनआईसीयू का सेटअप आईसीसीयू से भी अधिक सुरक्षित रहता है। एनआईसीयू किसी भी वार्ड से दूर बनाया जाता है ताकि बच्चों में संक्रमण न फैले लेकिन वर्तमान में जो एनआईसीयू संचालित है वह शिशु वार्ड से लगा हुआ है।
तीसरी बार उजड़ गई गोद
पटेरा की रहने वाली रामफुल की तीन दिन की बच्ची की मौत शुक्रवार को हो गई। इससे पहले भी दो बार मां बनने का सुख मिला, लेकिन बच्चे जीवित नहीं बचे। उसे भरोसा था कि अब की बार वह अपनी ममता इस बच्ची पर लुटा पाएगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। तीसरी बार भी उसकी गोद उजड़ गई। बेटी की मौत की खबर सुनते ही उसने अपना आपा खो दिया, डॉक्टरों को खूब बुरा भला कहा और शव लेने से इनकार कर दिया, काफी समझाने के बाद परिजन बच्ची का शव लेने के लिए तैयार हुए।
नसबंदी कांड से हुई दुनियाभर में बदनामी
प्रदेश में इससे पहले नसबंदी कांड के कारण पूरी दुनिया में बदनामी हो चुकी है। इस मामले में नसबंदी के दौरान 17 महिलाओं सहित कुल 19 लोगों ने दम तोड़ा था। इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने कवर किया था और यूएन ने भी इसे दर्दनाक बताया था।