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प्रेस नोट में खुलासा: माओवादियों ने बदली हमले की रणनीति, अब मोबाइल वॉर पर जोर

7 वर्ष पहले
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फोटो: नक्सली प्रवक्ता गणेश उईके का प्रेस नोट।
रायपुर। सुकमा में 14 जवानों की शहादत के बाद माओवादियों ने अपनी नयी नीति का खुलासा किया है। माओवादियों की दक्षिण रीजनल कमेटी के प्रवक्ता गणेश उईके के हस्ताक्षर से जारी इस प्रेस नेाट में उन्होंने कहा है कि अब तक गुरिल्ला वार करते आ रहे नक्सल लड़ाके अब मोबाइल वार करेंगे। मोबाइल वार का मतलब यह है कि अब नक्सली छिपकर नहीं बल्कि पुलिस थानों, चौकियों और आर्मी कैम्प्स तक जाकर उन्हें अपना निशाना बनाएंगे।
नवमीं कांग्रेस में हुआ था निर्णय

माओवादियों की नवमीं कांग्रेस 2006 में आयोजित हुई थी। इस कांग्रेस में यह निर्णय लिया गया था कि माओवादी अब मोबाइल वॉर करेंगे। इसके बाद 2006 में रानीगोटली में पहली ऐसी घटना हुई भी थी। इस हमले में हमने अपने 55 जवानों को खोया था। इसके बाद बीजापुर जिलेके मोरकिनार में ऐसा ही एक और हमला हुआ, लेकिन इसके बाद माओवादियों की नीति कमजोर पड़ गई। माना गया कि मोबाइल वार के लिए उनके पास पर्याप्त हथियार नहीं थे।

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एक बार फिर अपने प्रेस नोट में इस बिंदु का जिक्र बड़े खतरों का संकेत है। पिछले सालों में जितनी भी माओवादी घटनाएं हुई हैं, उसमें माओवादियों ने हथियार भी बड़ी मात्रा में लूटे हैं। यह माना जा रहा है कि माओवादियों ने हथियारों के लेवल पर एक बड़ी ताकत जमा कर ली है।

क्या है मोबाइल वार
अब तक नक्सली छिपकर गोरिल्ला वार के जरिए अपने मंसूबों को अंजाम देते आए हैं। इसके लिए वह सेना के जवानों का अपनी मांद में आने का इंतजार करते हैं। सड़कों पर बारूदी सुरंगें बिछाते हैं और धोखे से हमला कर जवानों को नुकसान पहुंचाते हैं। मोबाइल वॉर में इससे ठीक उल्टा होता है। इस नीति के तहत वह खुद ही नक्सल इलाके की पुलिस चौकियों, सेना के कैम्पों पर हमला करते हैं। इस तरह की स्थिति में सभी जवान पूरी तरह अलर्ट नहीं होते, और उन्हें ज्यादा नुकसान पहुंचने की संभावना होती है।