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डीएमई में सहायक ग्रेड तीन की भर्ती में अनियमितता, हाईकोर्ट ने भर्ती पर लगाई रोक

7 वर्ष पहले
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रायपुर। चिकित्सा शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड तीन की भर्ती में अधिकारियों ने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए शासन का नियम ही बदल दिया। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भर्ती पर आगामी आदेश तक रोक लगा दिया है।
महेश कुमार ने भर्ती में हुई अनियमितता पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने फरवरी में १२ सहायक ग्रेड तीन व विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। तब डीएमई डॉ. सुबीर मुखर्जी थे। उनके रिटायर होने के बाद प्रताप सिंह डीएमई बनाए गए हैं। जारी विज्ञापन में उम्मीदवारों के चयन के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू लेना था। लेकिन डीएमई के अधिकारियों ने मनमानी करते हुए इस नियम को ही बदल दिया। लिखित परीक्षा ९० व इंटरव्यू १० अंक के लिए होना था। इस नियम को बदलते हुए कौशल परीक्षा ले ली गई। और अपने चहेतों को मनमानी नंबर दे दिया गया। वर्तमान डीएमई ने यह भर्ती सीजीएमएससी यानी छग मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन को सौंप दिया। डीएमई प्रताप इस विभाग के एमडी भी हैं।
संविदा अधिकारी को नहीं है भर्ती का अधिकार
डीएमई के अधिकारियों ने यह भर्ती का जिम्मा सीजीएमएससी की एचआरडी अधिकारी को दे दी। जबकि ये संविदा में काम कर रही है। गौर करने वाली बात यह है कि कौशल परीक्षा २६ मई को मंदिर हसौद स्थित रायपुर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालॉजी में हुई। जबकि भर्ती का अधिकार सीजीएमएससी को १६ जून को दिया गया। अब तक डीएमई कार्यालय ही भर्ती करता रहा है। शासन के आदेशानुसार अगर किसी एजेंसी अधिकृत है तो वह व्यवसायिक परीक्षा मंडल है। सीजीएमएससी एजेंसी का काम नहीं कर सकती।
आरटीआई से हुआ खुलासा
डीएमई में हो रहे घपले का खुलासा कुछ उम्मीदवारों द्वारा आरटीआई लगाने के बाद हुआ। भर्ती के लिए २४ व २५ सितंबर को इंटरव्यू हुआ। इसके चयन समिति के अध्यक्ष डॉ. एएस दाऊ रहे। समिति में डिप्टी डीएमई डॉ. सुमीत त्रिपाठी व डॉ. आरके शर्मा रहे।
शासन के आदेश को नहीं बदल सकते
डीएमई के अधिकारी किसी भी भर्ती अथवा विज्ञापन में उल्लेखित नियमों को नहीं बदल सकते। जानकार बताते हैं कि इस तरह का काम नियम के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
कुछ नहीं कहना
इस संबंध में डीएमई प्रताप सिंह ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।