(लोगो आयुष युनिवर्सिटी)
रायपुर। आयुष विश्वविद्यालय प्रशासन एमबीबीएस के परचों का मूल्यांकन करने में नाकाम साबित हो रहा है। अब एमबीबीएस की परीक्षा मेडिकल कॉलेज में होगी और मूल्यांकन भी वहीं होगा। आयुष विश्वविद्यालय ने यह आदेश रायपुर, बिलासपुर व जगदलपुर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को दिया है। आयुष के अधिकारियों का मानना है कि ऐसा करने से रिजल्ट जल्द जारी होगा और एक दिसंबर से स्टूडेंट इंटर्नशिप शुरू कर सकेंगे।
आयुष विश्वविद्यालय ने एमबीबीएस फाइनल समेत अन्य वर्ष की परीक्षाओं का मूल्यांकन संबंधित कॉलेजों को करने के निर्देश दिए हैं। आयुष प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय में मूल्यांकनकर्ता बुलाने के कारण परचों के मूल्यांकन में देरी होती थी। मौखिक परीक्षा से लेकर प्रैक्टिकल भी कॉलेज में होता है। ऐसे में परचों का मूल्यांकन कॉलेज में कराने से कोई समस्या नहीं है। परचों के मूल्यांकन के लिए कोडिंग-डीकोडिंग व अन्य नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
31 दिसंबर के पहले रिजल्ट
मेडिकल कॉलेज में परचों का मूल्यांकन होने से 31 दिसंबर के पहले रिजल्ट निकालने का लक्ष्य दिया गया है। ताकि एमबीबीएस फाइनल ईयर में पास स्टूडेंट एक दिसंबर से इंटर्नशिप शुरू कर सके। पिछले साल भी विवि ने रिकार्ड 11 दिनों में फाइनल का रिजल्ट जारी किया था, पर परचों का मूल्यांकन विश्वविद्यालय में करवाया गया था।
मूल्यांकनकर्ता नहीं मिलने का रोना
विश्वविद्यालय समय पर मूल्यांकनकर्ता नहीं मिलने का रोना रोता है। इस कारण रिजल्ट में काफी देरी हो जाती है। जुलाई में आयोजित एमबीबीएस परीक्षा का रिजल्ट दिसंबर में जारी किया गया। बीडीएस व नर्सिंग का रिजल्ट निकालने में भी काफी देरी हुई थी। हाल ही में सभी मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन भी किया था।
एक दिसंबर से स्टूडेंट का इंटर्नशिप शुरू हो सके, इसलिए एमबीबीएस फाइनल ईयर के परचों का मूल्यांकन संबंधित कॉलेजों में करवाया जा रहा है। मूल्यांकन के सख्त नियमों का पालन किया जाएगा।- डॉ. केएल तिवारी, मुख्य परीक्षा नियंत्रक आयुष विवि
मूल्यांकन होगा प्रभावित- दाबके
पढ़ाने वाले डॉक्टर ही मूल्यांकन करेंगे तो मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है। अपने स्टूडेंट के प्रति सभी को प्रेम रहता है। स्वभाविक है, ऐसे में स्टूडेंट को ज्यादा अंक मिल सकते हैं।
डॉ. एटी दाबके, पूर्व कुलपति आयुष विवि