रायपुर। नया रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित साहित्य महोत्सव में देशभर के साहित्यकार और कवि जुटे हैं। महोत्सव में शहर के साहित्यप्रेमियों को कई हस्तियों को सुनने और विभिन्न विषयों पर उनके साथ चर्चा करने का मौका मिल रहा है। इस बीच प्रसिद्ध हास्य कवि अशोक चक्रधर ने dainikbhaskar.com से खास बात की। पेश है कुछ अंश-
सवाल- ऐसी कौन सी कविता है, जो आप हमेशा याद करते हैं?
जवाब- टेढ़ा सवाल है। जिन कविताओं ने पहचान और लोकप्रियता दिलाई। वे यादगार बन गईं। वैसे 1970-80 के दशक में विसंगतियों को प्रदर्शित किया। उसमें कटे हाथ, बूढ़े-बच्चे, सिपाही और कविता, तमाशा, भ्रष्टाचार महोत्सव सहित कई कविताएं यादगार हैं। वैसे मैंने कविताओं में हास्य को साधन बनाया, लेकिन हास्य मेरा साध्य नहीं है। मूलत: हास्य मेरी प्रवृत्ति नहीं है।
सवाल- ऐसा कोई वाक्या जो आपको हमेशा याद आता हो?
जवाब- भवानी प्रसाद मिश्र का एक संस्मरण है, जो हमेशा हमें हंसा देता है। हम कार से रामपुर से वापस लौट कर रहे थे। बारिश का मौसम था और रिमझिम बारिश हो रही थी। रास्ते में कीचड़ था। कई बार गाड़ी फिसली, लेकिन न पेड़ से टकराई और न ही खाईं में गिरी। आगे अचानक गाड़ी फिसली और दिल्ली की ओर जा मुड़ी। भवानी दादा के मुंह से निकला मजा आ गया। कुछ पलों के लिए मौत को सामने देखकर और उनकी बात दोनों हमेशा याद आती हैं।
सवाल- इस दौर में कवि की क्या स्थिति है?
जवाब- कवि की स्थिति हर काल में लोकप्रियता और धन के आधार पर आंकी जाती है। कविता तब आती है, जब विसंगतियां सामने आती हैं। धन आने पर कविता भाग जाती है।
सवाल- युवा नौकरीपेशा के कोर्स की ही पढ़ाई करते हैं। क्या कविता पाठ भी नौकरी पेशा का बेहतर माध्यम बन सकता है?
जवाब- कविता से कमाई नहीं होती है। हर युग में कविताओं का मंच बदला है। कविता नौकरी-पेशा का माध्यम तब बन सकती है, जब उसका पुस्तक या पत्रिकाओं में प्रकाशन हो और कवि को रॉयल्टी मिले।
सवाल- क्या कवि हसिए की धार में हैं। उन्होंने आगे बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब- वैसे तो कविताएं पाठ्यक्रम में शामिल हैं। लेकिन व्यंग्य अब तक नहीं हैं। हो सकता है इन्हें भी आगे शामिल किया जाए। इससे कवियों को मौका मिलेगा।
सवाल- ऐसा कोई विषय, जो आपके लिखने से अछूता रह गया हो या आप लिखना चाहते हों?
जवाब- विषय अनंत हैं। हर पर कविता लिखने का मन करता है। कई कविताएं बाध्यता में भी लिखा जाती हैं. वैसे नीम के पेड़ पर कविता लिखनी है।
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सभी फोटो: सुधीर सागर