रायपुर। गर्भाशय कांड के जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होने में देरी हो सकती है। इसका कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का विधानसभा सत्र में व्यस्त होना है। रविवार को स्वास्थ्य संचालक आर. प्रसन्ना ने कहा कि अगर विधानसभा सत्र के प्रश्नों से समय मिला तो डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में सोच पाएंगे।
शुक्रवार को पैसे के लालच में कम उम्र की महिलाओं का गर्भाशय निकालने वाले डॉक्टरों को तलब किया गया था। सुनवाई में यह स्पष्ट हो गया है कि अस्पताल संचालकों ने पैसे के लिए महिलाओं को कैंसर का डर दिखाकर जबर्दस्ती गर्भाशय निकाले। राजिम के सेवा सदन माता राजिम अस्पताल की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है। अस्पताल के संचालक डॉ. पंकज जायसवाल लगातार झूठ बोलते रहे। सुनवाई के दौरान चार सर्जन ने महिलाओं का ऑपरेशन करने से ही इनकार कर दिया। यही नहीं मरीजों का केस टिकट भी फर्जी निकला। इसे शासन ने गंभीरता से लेते हुए इस अस्पताल संचालक के खिलाफ गंभीर कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। संकेत है कि अस्पताल का लाइसेंस एक साल के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
समय मिला तो करेंगे कार्रवाई
अभी विधानसभा सत्र के सवालों को लेकर उलझे हुए हैं। सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में गर्भाशय कांड के आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ निर्णय लेने में कुछ देरी हो सकती है। बावजूद आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आर. प्रसन्ना, हेल्थ डायरेक्टर