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केंद्रीय गृहमंत्री के साथ बैठक में शामिल हुए सीएम

6 वर्ष पहले
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रायपुर। सम्मोहन (हिप्टोनिज्म) विद्या को भले ही अवैज्ञानिक और अंधविश्वास माना जाता हो, लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस इसे सीखने में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इसकी मदद से अपराधियों से सच उगलवाया जा सकता है।
सम्मोहन को अदालत में मान्यता नहीं है। अत: इस विधि से लिए गए अपराधी के बयान को कानूनी सबूत भी नहीं माना जा सकता। फिर भी पुलिस का कहना है कि इस तरीके से अपराधियों के झूठ बोलने की गुंजाइश कम हो जाएगी। पुलिस यह तर्क भी दे रही है कि सम्मोहन विद्या, लाई डिटेक्टर टेस्ट, नार्को टेस्ट जैसे तरीकों से सस्ता भी है।
पुलिस आम तौर पर पूछताछ के लिए मारपीट करती है। लेकिन कई हाईप्रोफाइल मामलों में यह संभव नहीं हो पाता। योजना है कि सम्मोहन का इस्तेमाल हाई प्रोफाइल मामलों में मददगार साबित होगा।
फोरेंसिक हिप्टोनिज्म
सच उगलवाने के लिए जिस विधि का उपयोग होगा उसे फोरेंसिक हिप्टोनिज्म कहा जाता है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट्स आरोपी को सम्मोहित कर उसके दिमाग को शून्य लगभग निष्क्रिय कर देंगे। ऐसे में वह किसी भी सवाल का झूठा जवाब देने में अक्षम हो जाएगा।
राज्य के डीजीपी अमरनाथ उपाध्याय भी इसे लेकर काफी आशान्वित हैं। उनका कहना है कि सम्मोहन की मदद जानकारी जुटाने से जुड़ी जानकारियां कलेक्ट की जा रही हैं। डीजीपी ने कहा, 'अच्छा रिस्पॉन्स मिलने पर इसका ट्रायल होगा।'