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६ घंटे में २७ महिलाओं को मातृत्व सुख देने की कोशिश से बनाया रिकॉर्ड

6 वर्ष पहले
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रायपुर। छह घंटे में 27 महिलाओं में एंब्रियो ट्रांसफर करके डॉ मनोज चेलानी ने छह लोगों की टीम के साथ गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। इस ट्रांसप्लांट से लंबे अरसे से मेडिकल कारणों से मां नहीं बन सकी महिलाओं को मातृत्व सुख मिल सकता है। गोल्डन बुक में इस तरह के रिकॉर्ड की यह नई कैटोगरी है। इससे पहले देश के किसी भी डॉक्टर ने इस तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं बनाया है। आठ फरवरी को आयुष टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में गोल्डन बुक इंडिया रिप्रेसेंटेटिव डॉ मनीष विश्नोई की उपस्थिति में यह रिकॉर्ड बनाया गया।
क्या है एंब्रियो ट्रांसप्लांट
मेल स्पर्म और फीमेल एग (अोव्यूल) को लैब में फर्टिलाइज करके पाइप के माध्यम से प्रेग्नेंसी के लिए फीमेल यूट्रिस में ट्रांसप्लांट करने का प्रोसेस एंब्रियो ट्रांसप्लांट कहलाता है। किसी कारण से महिला के गर्भाशय में फर्टिलाइजेशन नहीं होने पर इसे लैब में फर्टिलाइज करके ट्रांसप्लांट किया जाता है, जिससे महिला को मातृत्व का सुख मिल सके। कुछ केस में पति-पत्नी के ही स्पर्म और एग का ट्रांसप्लांटेशन होता है और कई बार डोनर से लेकर भी फर्टिलाइजेशन किया जाता है। रविवार को हुए 27 ट्रांसप्लांट में एक सेरोगेट मदर भी थी। पति पत्नी के स्पर्म व एग फर्टिलाइज करके सेरोगेट मदर में ट्रांसप्लांट किया गया। ताकि वह उनके बच्चे को कैरी कर सके और जन्म के बाद कपल को बच्चा मिल जाए। सोमवार को रिंग रोड में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में डॉ चेलानी ने बताया कि पिछले तीन महीने में इस तरह के ट्रांसप्लांट के लगभग 76 प्रतिशत सक्सेसफुल रिजल्ट मिले हैं।
हेल्थ गाइडलाइन हुई फॉलो
छह घंटे में रिकॉर्ड बनाने का प्रोसेस पूरी तरह नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ केयर एंड एक्सिलेंस की गाइडलाइन को ध्यान में रखकर किया गया। सभी ट्रांसप्लांट हाईजीन, लीगल एक्शन और मेडिकल सेफ्टी के साथ किए गए, जिसकी डॉ मनीष विश्वनोई ने भी प्रशंसा की।