रायपुर। सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक मुख्यालय से दो फरवरी को गोलापल्ली और किस्टाराम थाने के अंतर्गत पड़ने वाले अतिसंवेदनशील इलाकों में चुनाव संपन्न कराने गया दल नौ दिनों तक नक्सलियों के बीच बेस कैंपों में फंसा रहा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के अंतिम चरण में 14 सदस्यीय सात मतदान दल गोलापल्ली, पालाचलमा, टेटेमडग़ू, सिंगाराम, बंजलवाही, किस्टाराम और निमुलगुड़ा जैसे घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान संपन्न कराने गये हुए थे। नक्सलियों द्वारा पंचायत चुनाव के बहिष्कार और इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी मतदान कर्मियों को हेलीकॉप्टर की सहायता से पहले किस्टाराम और गोलापल्ली बेस कैंपों में उतारा गया। वहां से सभी मतदानकर्मी कड़ी सुरक्षा के बीच अपने अपने मतदान केंद्रों तक पहुंचे थे। चार फरवरी को मतदान संपन्न कराने के बाद सभी मतदान कर्मी सुरक्षा के बीच बेस कैंपों तक तो पहुंच गये, लेकिन इलाके में नक्सलियों की भारी मौजूदगी के चलते उन्हें लेने हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच सका। नक्सलियों के भय के चलते मतदान कर्मी पूरे नौ दिनों तक बेस कैंपों में फंसे रहे।
नौ दिन नहीं हुआ संपर्क, उड़ी नक्सल अपहरण की अफवाहकिस्टाराम और गोलापल्ली बेस कैंप के आसपास के इलाकों में मीलों
मोबाइल नेटवर्क नहीं है। इसके चलते दो फरवरी को चुनाव संपन्न कराने निकले मतदानकर्मियों का पूरे नौ दिनों तक अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो सका। प्रशासन भी जब मतदानकर्मियों की सही सही जानकारी नहीं दे पाया तो परिजन बेचैन हो गये। कोण्टा ब्लॉक में दिनभर मतदानकर्मियों के अपहरण जैसी अफवाहें उड़ती रही। इसके बाद परेशान परिजनों ने कर्मचारी संघ का दरवाजा खटखटाया। कर्मचारी संघ की ओर से प्रशासन को अल्टीमेटम दिए जाने के बाद आखिरकार किस्टाराम बेस कैंप में मौजूद आठ मतदानकर्मियों को हेलीकॉप्टर की सहायता से वापस ला लिया गया है। वहीं गोलापल्ली बेस कैंप में मौजूद छह मतदानकर्मियों को कैंप के निकट भारी संख्या में नक्सलियों की मौजूदगी के चलते लेने अब भी हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच सका है। मुख्य चुनाव आयुक्त पीसी दलाई की मानें तो इलाके के सुरक्षित होते ही अन्य मतदानकर्मियों को भी हेलीकॉप्टर की सहायता से वापिस लाया जाएगा।