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डाउनलोड करेंउदयपुर. वन्यजीवों में रुचि रखने वाले पर्यटकों को अगर पिंजरे में लॉयन नहीं दिखे तो उनका जू में आना अधूरा सा महसूस होता है। गुलाबबाग जू में लॉयन (शेर) वाले पिंजरे के बाहर शेर की जानकारी वाला बोर्ड तो लगा रखा है। लेकिन पिंजरे में शेर नहीं बल्कि भेडि़ए को रख रखा है।
मेवाड़ शासन के समय के बना विशाल पिंजरा जू में आने वालों को दूर से ही आकर्षित करता है। नजदीक आते शेर का बोर्ड तो दिख जाता है लेकिन पिंजरे में शेर नहीं दिखाई देता। ऐसे में दर्शकों की जुबां पर एक सवाल होता है। बोर्ड है, लेकिन पिंजरे में कहां है जंगल का राजा?
फुल सिंह और माधवी के बाद शेर नहीं: जू में फूलसिंह बब्बर शेर के बाद मादा माधवी लंबे समय तक एक मात्र शेरनी के रूप में आकर्षण का केन्द्र रही। माधवी की मौत के बाद पिंजरा सूना पड़ा है।
Photo_Tarachand Gawariya
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